भारत में करीब 70 साल बाद चीतों के कुनबे को दोबारा बसाने का महत्वाकांक्षी सपना अब धीरे-धीरे एक बड़े संकट में बदलता नजर आ रहा है। मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से एक बार फिर बेहद परेशान करने वाली खबर सामने आई है। कूनो में बनाए गए अत्याधुनिक वन्यजीव अस्पताल और नामीबिया-साउथ अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की चौबीसों घंटे निगरानी के दावों के बावजूद चीतों की अकाल मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में मुरैना के पहाड़गढ़ इलाके में गंभीर रूप से घायल मिली मादा चीता की इलाज के दौरान हुई मौत ने इस पूरे प्रोजेक्ट की सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साढ़े तीन साल के भीतर कूनो अब तक कुल 23 चीतों और उनके नवजात शावकों को हमेशा के लिए खो चुका है, जिसने वन्यजीव प्रेमियों को हिलाकर रख दिया है।
केवल एक शावक को जीवनदान, बाकी आपातकालीन मामलों में फेल साबित हुआ कूनो का सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल
चीता प्रोजेक्ट (Cheetah Project) की शुरुआत के साथ ही कूनो के पालपुर इलाके में करोड़ों रुपये की लागत से एक विश्वस्तरीय वन्यजीव अस्पताल का निर्माण किया गया था। इस अस्पताल को बनाने का मुख्य उद्देश्य यह था कि अगर कोई चीता बीमार होता है या आपसी संघर्ष में घायल होता है, तो उसे तुरंत ऑन-स्पॉट इमरजेंसी इलाज देकर बचाया जा सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिछले साढ़े तीन सालों में यह अस्पताल केवल एक नवजात शावक 'मुखी' को बचाने में कामयाब रहा है। इसके अलावा जब भी कोई चीता या शावक गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टर उसे जीवनदान देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। कूनो प्रबंधन के तमाम दावों के विपरीत आपातकालीन चिकित्सा प्रणाली बेहद लाचार नजर आ रही है।
नामीबिया के डॉक्टरों की वीडियो कॉल और मोबाइल आईसीयू भी बेअसर, कुदरत के आगे सब पस्त
कूनो का यह वन्यजीव अस्पताल तकनीकी रूप से बेहद उन्नत है। यहाँ स्पेशल वाइल्ड लाइफ मेडिकल इक्विपमेंट, ट्रेंक्यूलाइजर गन, अत्याधुनिक ब्लड टेस्ट लैब, अल्ट्रासाउंड, पोर्टेबल एक्स-रे और चलते-फिरते अस्पताल यानी 'मोबाइल आईसीयू' जैसी तमाम सुविधाएं मौजूद हैं। इतना ही नहीं, चीता कंजर्वेशन फंड (CCF) की प्रमुख डॉ. लारी मार्कर की टीम सहित नामीबिया और साउथ अफ्रीका के टॉप वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स हर समय वीडियो कॉल पर कंसल्टेशन के लिए उपलब्ध रहते हैं। देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक भी लगातार कूनो प्रबंधन के संपर्क में रहते हैं। लेकिन इन सब आधुनिक तामझाम और अंतरराष्ट्रीय डॉक्टरों की फौज के बावजूद चीतों की लगातार हो रही मौतें वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
कॉलर आईडी, ड्रोन और सीसीटीवी के दावे हवा-हवाई, हमले के अगले दिन चलती है रेस्क्यू टीम को खबर
प्रबंधन द्वारा लगातार यह दावा किया जाता है कि कूनो में चीतों की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू है। हर चीते के गले में सैटेलाइट कॉलर आईडी लगी है, जिससे उनकी पल-पल की लोकेशन मिलती है। इसके अलावा ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी और वनकर्मियों की स्पेशल ट्रैकिंग टीमें दिन-रात उनके पीछे साये की तरह रहती हैं। लेकिन इन दावों की कड़वी सच्चाई खुद प्रबंधन की रिपोर्ट में उजागर हो जाती है। जब भी किसी चीते या शावक पर किसी अन्य हिंसक जानवर ने हमला किया है या वे आपसी लड़ाई में घायल हुए हैं, तो ट्रैकिंग टीम को इसकी भनक अगले दिन या कई घंटों बाद लगी है। लेटलतीफी के इसी सच के कारण समय पर इलाज न मिलने से कई चीतों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
कूनो में कब, कैसे और किस चीते ने गंवाई अपनी जान? देखिए तबाही की पूरी टाइमलाइन:
जंगल में आपसी संघर्ष और हिंसक हमलों के शिकार:
-
दक्षा: 9 मई 2023 को मेटिंग (संसर्ग) के दौरान नर चीतों के साथ हुए हिंसक संघर्ष में मौत।
-
तेजस: 11 जुलाई 2023 को अन्य हिंसक वन्यजीव के साथ लड़ाई में गंभीर चोटों के कारण मौत।
-
सूरज: 14 जुलाई 2023 को आपसी लड़ाई के दौरान गर्दन और शरीर पर गहरे घाव होने से मौत।
-
चीता निर्वा के 2 शावक: जन्म के महज पांच दिन बाद 28 नवंबर 2024 को घने जंगल में मृत पाए गए।
-
गामिनी का एक शावक: आपसी संघर्ष में रीढ़ की हड्डी टूटने (फ्रैक्चर) के बाद 5 अगस्त 2025 को दम तोड़ा।
-
चीता केजीपी 12 के 4 शावक: 12 मई 2026 को जंगल के अंदर इनके क्षत-विक्षत शव बरामद हुए।
-
चीता केजीपी 11: 6 जून 2026 को पहाड़गढ़ के जंगलों में घायल मिलने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा।
बीमारी, डिहाइड्रेशन और संक्रमण की वजह से मौत:
-
चीता साशा: मार्च 2023 में भारत आने के कुछ समय बाद ही किडनी की गंभीर बीमारी के कारण मौत।
-
चीता ज्वाला के 3 शावक: भीषण गर्मी, कुपोषण और अत्यधिक डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) के कारण 23 मई 2023 को मौत।
-
चीता उदय: 23 अप्रैल 2023 को अचानक आए जोरदार कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) से मौत।
-
चीता धात्री: गले में कॉलर आईडी के नीचे हुए गंभीर इन्फेक्शन (संक्रमण) और कीड़े पड़ने के चलते 2 अगस्त 2023 को मौत।
-
चीता शौर्य: लंबे समय से बीमारी और अत्यधिक शारीरिक कमजोरी के चलते 16 जनवरी 2024 को दम तोड़ा।
-
नर चीता पवन: 27 अगस्त 2024 को कूनो के एक नाले में पानी के तेज बहाव में डूबने से रहस्यमयी मौत।
Comments are closed.