दो सीटें, कई बड़े दावेदार और उलझा विधायकों का गणित; 'इंडिया' ब्लॉक में रार के बीच क्यों दिलचस्प हुआ झारखंड राज्यसभा चुनाव
झारखंड की सियासत में इन दिनों राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। सीटों की संख्या भले ही सिर्फ दो है, लेकिन दावेदारों की लंबी फेहरिस्त और विधानसभा के भीतर विधायकों के जादुई गणित ने इस मुकाबले को बेहद पेचीदा और रोमांचक बना दिया है। सत्ताधारी 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) गठबंधन के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर मची अंदरूनी रार ने इस सियासी खेल में घी डालने का काम किया है। हर बार की तरह इस बार भी संख्या बल के आंकड़ों में छिपे झोल ने राजनीतिक पंडितों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा।
विधायकों की संख्या और जीत का जादुई आंकड़ा
झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो एक राज्यसभा सीट पर सीधे जीत दर्ज करने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को एक निश्चित कोटे के विधायकों के वोट की जरूरत होती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन के पास संख्या बल के हिसाब से एक सीट पर आसानी से जीत दर्ज करने का बहुमत है, लेकिन पेंच दूसरी सीट को लेकर फंसा हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दल भी पूरे दमखम के साथ इस चुनावी समर में उतर चुके हैं। ऐसे में किसी भी दल के भीतर जरा सी भी क्रास वोटिंग या विधायकों की नाराजगी पूरे खेल को पूरी तरह से पलट सकती है।
'इंडिया' गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर मची रार
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा सत्ताधारी गठबंधन के बीच चल रही खींचतान की हो रही है। कांग्रेस का मानना है कि पिछले समीकरणों और वादों के मुताबिक इस बार राज्यसभा की सीट उसके खाते में आनी चाहिए, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते इस सीट पर अपना स्वाभाविक दावा ठोक रही है। इस खींचतान के कारण उम्मीदवारों के नामों की घोषणा में भी काफी माथापच्ची देखने को मिल रही है। गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच चल रही यह अंदरूनी खींचतान विपक्ष यानी भाजपा के लिए एक बड़े सुनहरे मौके की तरह देखी जा रही है, जो असंतुष्ट विधायकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की बढ़ी अहमियत
जब भी राज्यसभा चुनाव में गणित उलझता है, तो छोटे राजनीतिक दलों और निर्दलीय विधायकों की चांदी हो जाती है। झारखंड की इस सियासी जंग में भी आजसू (AJSU), वामपंथी दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका बेहद निर्णायक हो चुकी है। दोनों ही खेमे इन विधायकों को अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। बंद कमरों में लगातार बैठकों का दौर जारी है और रणनीतियां बदली जा रही हैं। रिपोर्टर के इनपुट्स के मुताबिक, वोटिंग के आखिरी दिन तक यह साफ-साफ कह पाना मुश्किल होगा कि कौन सा विधायक किस पाले में खड़ा है, जिसने इस चुनाव को झारखंड के इतिहास का सबसे सस्पेंस से भरा राज्यसभा चुनाव बना दिया है।
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