ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद के बीच 12वीं का पूरा डेटा अपने सर्वर पर किया ट्रांसफर, IIT एक्सपर्ट्स ने कसी कमर
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी भारी विवादों और तकनीकी गड़बड़ियों के बीच बोर्ड ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। सीबीएसई ने छात्रों की गोपनीयता और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं और पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) से जुड़े तमाम संवेदनशील डेटा को एक निजी कंपनी के सर्वर से पूरी तरह हटा दिया है। बोर्ड ने इस पूरे रिकॉर्ड को अब अपने खुद के सुरक्षित और आधिकारिक सर्वरों पर सफलतापूर्वक स्थानांतरित (माइग्रेट) कर लिया है। यह फैसला परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्र हितों की रक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय से डिजिटल चेकिंग के तरीकों पर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे।
छात्र की गायब कॉपी और अधूरी मार्कशीट से मचा था हड़कंप, इस बड़ी लापरवाही के बाद जागा बोर्ड
यह पूरा मामला तब गरमाया जब सीबीएसई 12वीं के एक छात्र तनिष्क वत्स की मार्कशीट में भारी गड़बड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया था। परिणाम घोषित होने के बाद छात्र को जो मार्कशीट मिली, उसमें विषयवार अंक ही दर्ज नहीं थे। इसके बाद जब परेशान परिवार ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत सभी छह विषयों की स्कैन की गई उत्तरपुस्तिकाएं बोर्ड से मांगीं, तो उन्हें केवल पांच विषयों की ही कॉपियां उपलब्ध कराई गईं और सबसे महत्वपूर्ण जीव विज्ञान (बायोलॉजी) की उत्तरपुस्तिका सिस्टम से पूरी तरह गायब मिली। हालांकि, बढ़ते विवाद को देखते हुए सीबीएसई ने बाद में छात्र को गायब कॉपी ढूंढकर मुहैया कराई और परिणाम घोषित होने के पांच दिन बाद यानी 18 मई को संशोधित मार्कशीट भी जारी कर दी, लेकिन इस बड़ी लापरवाही ने बोर्ड की डिजिटल चेकिंग प्रणाली की कलई खोलकर रख दी थी।
आईआईटी कानपुर और मद्रास के साइबर सुरक्षा दिग्गजों ने संभाली कमान, पांच चरणों में हुआ सुरक्षा ऑडिट
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की साख पर बट्टा लगने के बाद सीबीएसई ने तुरंत देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों का रुख किया। बोर्ड ने ओएसएम पोर्टल की तकनीकी खामियों और संभावित साइबर खतरों को दूर करने के लिए आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) और आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के प्रख्यात साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद ली। आईआईटी के अधिकारियों, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन और सीबीएसई की संयुक्त टीमों ने मिलकर कई चरणों में इस पूरे प्लेटफॉर्म का कड़ा सुरक्षा परीक्षण किया। सुरक्षा जांच के दौरान ओएसएम प्लेटफॉर्म के कोडिंग की गहराई से समीक्षा की गई और उसमें मौजूद तमाम लूपहोल्स (कमजोरियों) को सुधारा गया। इस पूरे डिजिटल सिस्टम को दोबारा लाइव करने से पहले विशेषज्ञों द्वारा पांच कड़े चरणों में इसका सुरक्षा मूल्यांकन किया गया, ताकि भविष्य में डेटा लीक या कॉपियों के गायब होने जैसी कोई घटना दोबारा न हो सके।
दागदार कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक को ही मिला स्कैनिंग का काम, जानिए क्यों बोर्ड ने नहीं किया ब्लैकलिस्ट
इस पूरे विवाद का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि तकनीकी खामियों और डेटा सुरक्षा में चूक के बावजूद सीबीएसई ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग का काम हैदराबाद की विवादित कंपनी 'कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड' को ही जारी रखने की अनुमति दी है। बोर्ड ने कंपनी को इस पूरी प्रक्रिया से बाहर नहीं करने का एक व्यावहारिक कारण बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी ने इस सत्र में पहले लगभग 40 करोड़ पृष्ठों की स्कैनिंग की थी, जिनमें से सिर्फ 30 हजार पृष्ठों में ही कुछ तकनीकी समस्या सामने आई थी। चूंकि अब डेटा पूरी तरह से सीबीएसई के अपने सर्वर और नियंत्रण में आ चुका है, इसलिए बचे हुए विवादित या प्रभावित पेजों की री-स्कैनिंग का काम यह कंपनी आसानी से और बिना समय गंवाए पूरा कर सकती है।
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