DMK vs. Congress Battle Intensifies in Tamil Nadu: Congress MP Manickam Tagore Hits Back at Udhayanidhi’s Sharp Attack तमिलनाडु में द्रमुक बनाम कांग्रेस की जंग तेज, उदयनिधि के तीखे हमले पर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर का पलटवार

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदल चुका है। लगभग दो दशकों तक कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले दो बड़े सियासी दोस्त द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और कांग्रेस अब एक-दूसरे के धुर विरोधी बन चुके हैं। रविवार को कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मणिकम टैगोर ने पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा कांग्रेस पर किए गए तीखे हमले का करारा जवाब दिया है। स्टालिन के ‘कांग्रेस पर कभी भरोसा न करने’ वाले बयान पर टैगोर ने कहा कि द्रमुक के सबसे कठिन समय में भी कांग्रेस हमेशा उसके साथ खड़ी रही है, ऐसे में उदयनिधि का इस तरह का बयान देना पूरी तरह से गलत और मर्यादाहीन है।

भाजपा के साथ परदे के पीछे चल रहा है खेल: मणिकम टैगोर

समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत करते हुए कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने उदयनिधि स्टालिन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने एक बड़ा सियासी खुलासा करते हुए कहा, “कांग्रेस पार्टी हमेशा से ही धर्मनिरपेक्ष गठबंधन (Secular Alliance) के सिद्धांतों के साथ अडिग रही है। लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद द्रमुक (DMK) खुद भाजपा और एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ जुड़ने का प्रयास कर रही थी, जो हमारे बुनियादी सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। भाजपा के साथ किसी भी तरह का गठबंधन या समझौता कांग्रेस को कभी स्वीकार नहीं होगा।”

टैगोर का इशारा तमिलनाडु की दो चिर-विरोधी पार्टियों के बीच पर्दे के पीछे हुई कथित बातचीत की तरफ था। गौरतलब है कि अभिनेता से नेता बने थलापति विजय के गठबंधन में शामिल वीसीके (VCK) के अध्यक्ष ने भी हाल ही में दावा किया था कि द्रमुक और अन्नाद्रमुक दोनों ने ही उन्हें साथ आने और मुख्यमंत्री पद का ऑफर दिया था। स्टालिन के भरोसे वाले बयान पर पलटवार करते हुए टैगोर ने याद दिलाया कि जब द्रमुक के पास पूर्ण बहुमत नहीं था, तब भी कांग्रेस ने बिना शर्त उनका साथ दिया था।

उदयनिधि का फूटा गुस्सा: ‘कांग्रेस पर अब कभी नहीं करेंगे भरोसा’

इससे पहले, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ने वाली कांग्रेस पर पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने बेहद तल्ख टिप्पणी की थी। थलापति विजय की पार्टी के साथ हाथ मिलाने वाली कांग्रेस को घेरते हुए स्टालिन ने साफ लफ्जों में कहा था कि द्रमुक भविष्य में कभी भी कांग्रेस पार्टी पर भरोसा नहीं करेगी। इतना ही नहीं, उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर बुनियादी शिष्टाचार और कृतज्ञता (Gratitude) की कमी होने का भी गंभीर आरोप लगाया।

‘अपनी वजह से नहीं, हमारी साख पर जीती है कांग्रेस’

उदयनिधि स्टालिन ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा, “हमारे कैडरों और कार्यकर्ताओं की जमीनी मेहनत की वजह से कांग्रेस ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीती हैं। जनता ने कांग्रेस को इसलिए वोट दिया क्योंकि वे थलापति एम के स्टालिन को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते थे। लेकिन आज कुछ राजनीतिक पदों के लालच में कांग्रेस हमें बिना बताए गठबंधन छोड़कर चली गई। अब हमें भविष्य में कांग्रेस को कभी भी अपने करीब नहीं आने देना चाहिए।” उदयनिधि ने तो यहां तक कह दिया कि देश में भाजपा की जीत प्रधानमंत्री मोदी या अमित शाह की वजह से नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी की कमजोरियों की वजह से होती है।

4 मई के बाद बदली तमिलनाडु की पूरी कमान, लोकसभा में भी दूरी

दरअसल, तमिलनाडु की राजनीति के इन दो बड़े क्षत्रपों के बीच विवाद की असली शुरुआत 4 मई 2026 के बाद हुई। करीब बीस साल पुराना यह मजबूत गठबंधन उस वक्त ताश के पत्तों की तरह बिखर गया जब कांग्रेस पार्टी ने अपने पांच विधायकों के साथ थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलझा वेत्री कड़गम’ (TVK) को समर्थन देने का आधिकारिक एलान कर दिया। इस फैसले के बाद से ही दोनों दलों के बीच कटुता अपने चरम पर पहुंच गई है। हालत यह है कि द्रमुक ने लोकसभा में भी कांग्रेस सांसदों के साथ बैठने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि, दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस मुद्दे पर अभी तक चुप्पी साध रखी है, लेकिन राज्य स्तर पर दोनों पार्टियों के बीच यह राजनीतिक युद्ध और आक्रामक होता जा रहा है।

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