BJP’s Grand Triumph in Bengal: Debangshu Panda Wins Falta Seat by 1.09 Lakh Votes; TMC Slips to Fourth Place. बंगाल में BJP का महा-धमाका फलता सीट पर 1.09 लाख वोटों से जीते देबांग्शु पांडा, चौथे नंबर पर खिसकी TMC
पश्चिम बंगाल के सियासी दंगल से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। फलता विधानसभा सीट पर हुए हाई-प्रोफाइल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एकतरफा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। बीजेपी के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी माकपा (CPIM) के शंभु नाथ कुर्मी को रिकॉर्ड 1,09,021 से भी अधिक मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी है। इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका राज्य की पूर्व सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लगा है, जिसके उम्मीदवार चौथे नंबर पर खिसक गए हैं। वहीं, कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मुल्ला महज 10 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
चुनाव नतीजों की रफ्तार पर अभिषेक बनर्जी ने उठाए सवाल
फलता में मिली इस करारी और ऐतिहासिक हार के बाद डायमंड हार्बर से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पूरी तरह बिफर गए हैं। उन्होंने मतगणना की प्रक्रिया पर गहरी आपत्ति जताते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से लिखित स्पष्टीकरण की मांग की है। अभिषेक बनर्जी ने नतीजों में बड़ी विसंगतियों का आरोप लगाते हुए कहा, “पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दोपहर 3 बजे तक वोटों की गिनती के 21 राउंड पूरे कर लिए गए। जबकि अमूमन इस समय तक सिर्फ 2 से 4 राउंड की गिनती ही पूरी हो पाती थी। आखिर इतनी हड़बड़ी और तेजी के पीछे क्या राज है?”
ईवीएम पर इत्र छिड़कने और बूथ कैप्चरिंग के बाद हुआ था री-पोल
आपको बता दें कि फलता सीट पर शुरुआती मतदान के दौरान व्यापक स्तर पर धांधली और गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई थीं। कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनों पर इत्र जैसी कोई संदिग्ध चीज छिड़कने, विपक्षी दलों के चुनाव चिह्नों को जानबूझकर ढकने और बूथ कैप्चरिंग के गंभीर आरोप लगे थे। इन शिकायतों को सही पाते हुए चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को पूरी विधानसभा के सभी 285 बूथों पर दोबारा मतदान (Re-polling) कराने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। दोबारा हुए इस मतदान में केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के बीच रिकॉर्ड 86 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी।
मैदान छोड़ चुके थे टीएमसी प्रत्याशी, अभिषेक बनर्जी ने लगाया एजेंट्स को भगाने का आरोप
इस चुनाव की एक और दिलचस्प बात यह रही कि वोटिंग से पहले ही टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने मैदान छोड़ते हुए चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था, हालांकि तकनीकी कारणों से ईवीएम पर उनका नाम और चुनाव चिह्न मौजूद था। अपनी पार्टी की इस दुर्गति पर दुख जताते हुए अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया, “फलता में टीएमसी के 1,000 से अधिक सक्रिय कार्यकर्ताओं को डरा-धमकार भगा दिया गया और चुनाव आयोग आंखें मूंदे बैठा रहा। दिन-दहाड़े हमारी पार्टी के दफ्तरों पर हमले हुए। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बीजेपी को छोड़कर बाकी सभी विपक्षी दलों के पोलिंग एजेंट्स को भी काउंटिंग सेंटरों से खदेड़ दिया गया। यह लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर सीधा हमला है।”
‘डायमंड हार्बर मॉडल’ ही बना टीएमसी की हार का कारण: सीएम शुभेंदु अधिकारी
फलता में बीजेपी की इस प्रचंड जीत पर खुशी जाहिर करते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर तीखा तंज कसा है। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “बंगाल की जनता को पूरे 15 साल के लंबे इंतजार के बाद आज भयमुक्त होकर वोट डालने की आजादी मिली है, और स्वतंत्र मतदान होते ही सारा सच दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। टीएमसी अब राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक माफिया कंपनी बनकर रह गई थी, जिसने राज्य की सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर जनता की गाढ़ी कमाई को दोनों हाथों से लूटा। जिस ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ का ये ढिंढोरा पीटते थे, आज वही मॉडल टीएमसी की विदाई और करारी हार का सबसे बड़ा कारण बन गया है।”
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