आपके अंगो पर दिखने वाले तिल का क्या है सेहत से नाता, जाने इसके पीछे का विज्ञानं

न्यूज़ डेस्क : बहुत सारे लोगों के चेहरे पर या शरीर के किसी हिस्से में काले या भूरे रंग का उभरा निशाना होता है। इसे तिल, मस्सा या अंग्रेजी में मोल(Mole) कहा जाता है। गालों पर या होठों पर छोटे तिल खूबसूरत भी लगते हैं, लेकिन बड़े या ज्यादा संख्या में हों तो खूबसूरती कम कर देते हैं। भारतीय परिदृश्य में तिल के अलग-अलग मायने बताए गए हैं। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तिल होने का संबंध धनप्राप्ति, शादी, संतान सुख और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता रहा है। तिल का होना संयोग या भाग्य से जोड़े जाने से इतर इसके वैज्ञानिक कारण भी बताए गए हैं।

 

मेडिकल साइंस में तिल का संबंध पिगमेंट मेलानिन से बताया जाता है, जोकि शरीर के रंग के लिए जिम्मेदार होता हैं। मेलानिन ऐसा पिगमेंट है, जो हमारे शरीर के कई सारे सेल्स से बना होता है। इसे मेलानोसाइट्स कहा जाता है, जो हमारे कलर कॉम्प्लेक्शन निर्धारित करता है। सूर्य की रोशनी के संपर्क में मेलानोसाइट्स के आने पर तिल बनते हैं। हमारे जीन्स से तो इसका संबंध होता ही है, कई बार डायबिटीज के कारण भी तिल होते हैं। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान हार्मोन्स में बदलाव के कारण भी तिल होता है। 

 

आपके चेहरे या शरीर पर एक तिल भी हो सकता है, कई जगह पर हो सकता है या फिर एक जगह पर एक सारे तिल भी हो सकते हैं। बहुत सारे लोगों को जन्म से ही तिल होता है। कई लोगों को 30 साल की उम्र तक भी तिल निकलते हैं। वहीं, समय के साथ तिल गायब भी हो जाते हैं। तिल का गहरा रंग समय के साथ हल्का भी होने लगता है और  लाइट भी होने लगता है। वक्त बीतने और उम्र बढ़ने पर तिल गायब भी होने लगते हैं 

 

कई जगहों पर तिल खूबसूरती भी बढ़ाते हैं तो कई बार यह खूबसूरती बिगाड़ भी देते हैं। कई तिलों में बाल भी उग आते हैं। हालांकि वैक्सिंग या थ्रेडिंग से इसे आसानी से निकाला जा सकता है। शरीर में ज्यादा तिल कैंसर का कारण भी बन सकता है। मेलानोमा- यह एक प्रकार का स्किन कैंसर होता है। हालांकि रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि 3164 मामलों में से महज एक ऐसा मामला सामने आता है। 

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