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#AvdheshanandGMaharaj

प्रार्थना हमें अपने आंतरिक आत्मा के साथ सम्बन्ध स्थापित करने में सहयोग करती है : श्री अवधेशानंद जी…

पूज्य "सद्गुरुदेव" जी ने कहा - "पुनन्तु मा पितर: सौम्यास: पुनन्तु मा पितामहा: ..!" आप की महान उपलब्धियों, समृद्धि, सर्वत्र व्याप्त कीर्ति और चमत्कृत करती उच्चता के जड़ मूल में पूर्वजों के आशीष और देव अनुग्रह ही अदृश्य रूप में समाहित हैं !…
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अन्यों की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करना सबसे बड़ा धर्म है : अवधेशानंद जी महाराज

News Desk :  पूज्य "सद्गुरुदेव" जी ने कहा - रक्तदान न केवल सामाजिक उत्तरदायित्व है, अपितु अनेक हृदयों में विविध धमनियों द्वारा स्वयं की रक्त ऊर्जा संचरित कर अन्यों को स्वास्थ्य व जीवन दान देने का अलभ्य अवसर है। रक्तदान स्वास्थ्यवर्धक व जीवन…
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