Sikkim Tunnel Collapse: सिक्किम में बड़ा हादसा! भूस्खलन के बाद निर्माणाधीन टनल में जहरीली मीथेन गैस का रिसाव, 7 मजदूरों की मौत, कई अंदर फंसे; रेस्क्यू में आ रही भारी रुकावटें

उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। सिक्किम के नामची (दक्षिण सिक्किम) क्षेत्र में तीस्ता चरण-6 जलविद्युत परियोजना (Teesta Stage-6 Hydroelectric Project) के तहत बनाई जा रही सामरदुंग-मामरिंग (झोलुंगे) सुरंग में अचानक हुए भूस्खलन और उसके बाद संदिग्ध मीथेन गैस के रिसाव (Methane Gas Leakage) के कारण बड़ा हादसा हो गया है। टनल का मुख्य द्वार मलबे से बंद होने के कारण भीतर काम कर रहे कई मजदूर फंस गए। ताजा रिपोर्टों और प्रशासनिक पुष्टि के अनुसार, इस भयावह हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 18 से 20 मजदूर अभी भी टनल के भीतर फंसे हुए हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो टनल के भीतर फैली विषैली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण राहत एवं बचाव कार्य (Rescue Operations) इतिहास के सबसे कठिन पड़ाव से गुजर रहा है।

जहरीली मीथेन गैस और ऑक्सीजन की कमी ने रोकी राह

सोमवार दोपहर हुए भूस्खलन के बाद जब सुरंग का निकास द्वार पूरी तरह अवरुद्ध हो गया, तो टनल के भीतर भारी दबाव के कारण संदिग्ध मीथेन गैस का रिसाव शुरू हो गया। इसके चलते बचाव अभियान में लगे कर्मियों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं:

  • बचावकर्मियों की बिगड़ी तबीयत: टनल के भीतर जमा जहरीली गैस और दम घुटने वाली परिस्थितियों के कारण शुरुआती राहत दल के कई सदस्यों को चक्कर आने और अचेत होने की शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से ‘गैस मास्क’ और अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस इमरजेंसी टीमों को बुलाया गया है।

  • विस्फोट और भूस्खलन का खतरा: टनल के भीतर मीथेन गैस की भारी मौजूदगी के कारण किसी भी प्रकार के स्पार्क से बड़े विस्फोट की आशंका बनी हुई है, जिससे मलबे को हटाने में भारी सावधानी बरतनी पड़ रही है।

पटेल इंजीनियरिंग और NHPC से जुड़े हैं फंसे मजदूर

यह सुरंग एनएचपीसी (NHPC) की तीस्ता चरण-6 जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है, जिसका निर्माण ठेका पटेल इंजीनियरिंग (Patel Engineering) के पास है। घटना के वक्त टनल के भीतर एनएचपीसी अधिकारियों के साथ-साथ कई संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) मजदूर नियमित खुदाई और मेंटेनेंस के काम में लगे हुए थे। एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें लगातार सुरंग के भीतर ऑक्सीजन सिलेंडर पंप करने और पाइपलाइन के जरिए ताजी हवा पहुंचाने की कोशिश में जुटी हुई हैं, ताकि अंदर फंसे लोगों की सांसें बचाई जा सकें।

प्रशासन और डॉक्टरों की टीम अलर्ट पर

घटनास्थल पर नामची के जिलाधिकारी (DC), पुलिस अधीक्षक (SP) और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी भारी पुलिस बल और कई एंबुलेंस गाड़ियों के साथ मुस्तैद हैं। टनल के बाहर अस्थायी मेडिकल कैंप स्थापित किया गया है ताकि जैसे ही किसी मजदूर को बाहर निकाला जाए, उसे तुरंत प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर (रंगपो या गंगटोक अस्पताल) रेफर किया जा सके। राज्य सरकार और केंद्र सरकार भी इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन पर पल-पल की नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना ही इस समय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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