दीया जलाकर घर-आंगन ही रोशन न करें, बल्कि ज्ञान का उजियारा भी फैलाएं

नई दिल्ली । इस दीपोत्सव पर दीया जलाकर घर-आंगन ही रोशन नहीं करें बल्कि ज्ञान का उजियारा भी फैलाएं और कुछ दान किताबों के लिए करें। आपके दान से खरीदी जाने वाली किताबें 6 से 12 वर्ष के उन बच्चों को आगे बढ़ने में मदद करेगी जो परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण शिक्षा से महरूम हैं।

आठ हजार बच्चों को भेजी जा चुकी हैं किताबें 

दरअसल, नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) ने दानराशि को बच्चों के बौद्धिक विकास से जोड़ने की अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत झुग्गी बस्तियों में रहने वाले बच्चों को किताबें वितरित की जाएंगी। एनबीटी की इस देशव्यापी मुहिम में चार माह में करीब तीन लाख रुपये दान में मिल चुके हैं और विभिन्न राज्यों के करीब आठ हजार बच्चों को किताबें भेजी जा चुकी हैं।

‘हर हाथ एक किताब’

‘हर हाथ एक किताब’ नाम से यह पहल एनबीटी ने जून में शुरू की थी। इसके लिए उसने ई-कॉमर्स वेबसाइट स्नैपडील से करार किया है। इस वेबसाइट पर ही लोग किताबों के लिए दान भेजते हैं। वहां से दान राशि एनबीटी को ऑनलाइन ट्रांसफर की जाती है। दानदाता से पूछा जाता है कि वह किस राज्य या एनजीओ के बच्चो कों किताबें पहुंचाने की इच्छा रखता है। इसके बाद एनबीटी अपने नेटवर्क से वहां उस राशि की किताबें पहुंचा देता है। किताबो की खरीद पर 25 फीसद छूट मिलती है, जिसमें से डेढ़ फीसद वेबसाइट को मिलता है।

समाज में कई लोग बहुत कुछ करना चाहते हैं

दर्जनों बच्चों के हाथों में किताबें देने वाले एमसीए युवा उपेंद्र राणा कहते हैं कि साक्षरता और ज्ञान का प्रकाश फैलाने के लिए समाज में कई लोग बहुत कुछ करना चाहते हैं किन्तु उचित प्लेटफार्म नहीं मिलता। एनबीटी की यह मुहिम सराहनीय है। स्वयं डिजिटल मार्केटिंग की बेस्ट सेलर श्रेणी के लेखक उपेंद्र ने यह भी कहा कि भविष्य में एनबीटी को बच्चों से आगे निकलकर युवा वर्ग और डिजिटल पठन संस्कृति के लिए भी इस पहल का विस्तार करना चाहिए।

एनबीटी के चैयरमेन बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि इस पहल से झुग्गी में रहने वाले बच्चों में पठन संस्कृति का विकास होगा। बहुत जल्द हम अधिक से अधिक बच्चों तक किताबें पहुंचाने में सफल हो जाएंगे।

News Source: jagran.com

Comments are closed.