राजीव मसंद ने बातचीत शुरू करते हुए कहा, “आप एक साथ कई चीज़े करती हैं…” इसपर फ़राह ख़ान ने कहा, “प्राथमिक तौर पर मैं 3 बच्चों की मां हूं. पिछले 12 सालों में मैंने महज़ 4 फ़िल्में कीं हैं. तो यह वो काम है, जिसे मैंने सबसे कम किया है.”
किसी भी गाने को कोरियोग्राफ़ करने की सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है?
“जब एक डायरेक्टर का दृष्टिकोण साफ़ हो, तो गाने को कोरियाग्राफ़ करना बेहद आसां हो जाता है. मणिरत्नम का नज़रिया हमेशा ही स्पष्ट होता है. वे अपने टेक्निशियन्स को सर्वश्रेष्ठ देने के लिए बहुत पीछे पड़ते हैं. इस मामले में कुंदन शाह, मंसूर ख़ान… सभी बढ़िया हैं.”
मसाला फ़िल्म बनाने के इल्ज़ाम पर फ़राह ख़ान ने कहा, “कृपया अपने दिमाग या फिर शरीर का कोई भी हिस्सा पीछे छोड़कर फ़िल्म देखने के लिए न आएं. एक आम धारणा है कि जिस फ़िल्म में एंटरटेनमेंट होता है, उसमें ज़्यादा वैल्यू नहीं होता है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारा नज़रिया पक्षपाती किस्म का होता है.”
उन्होंने कहा, “मैं सभी तरह की फ़िल्में पसंद करती हूं… मैं कलात्मक फ़िल्मों को उनकी ख़ूबसूरती व शांति के लिए पसंद करती हूं. मैं ऐसी फ़िल्में पसंद करती हूं, जो एक व्यक्ति के तौर पर आपको जस का तस रहने देते हैं. किसी भी फ़िल्म को बस एक काम नहीं करना चाहिए और वो है बोर करना. मैं इस बात की कतई उम्मीद नहीं करती हूं कि कोई भी फ़िल्म आपको किसी तरह की कोई सीख दे… कम से कम कथावाचन के अंदाज़ में तो बिल्कुल भी नहीं. मुझे मुन्नाभाई बेहद पसंद आई थी, जिसमें मनोरंजन भी था और संदेश भी.”
क्या फ़िल्मों का सामज पर किसी तरह का असर भी होता है?
ऐसा होता तो लोग गांधीगिरी को बड़े पैमाने पर अपना लेते या फिर मैं हूं न देखने के बाद भारत-पाक संधि हो जाती.”
एक फ़ीमेल डायरेक्टर के तौर पर संबोधित किये जाने के बारे में पूछे जाने पर फ़राह ने कहा, “यह किसी लिंग पर अविलम्बित कार्य नहीं है. मुझे किसी खांचे में मत डालिए. कई महिलाओं को इससे समस्या नहीं है और वो ये सुनकर ख़ुश होती हैं, मगर मैं इसे सिरे से नकार देती हूं.”
हम और अधिक महिला प्रधान फ़िल्में क्यों नहीं बनाते हैं?
“क्योंकि सभी एक प्रकार के बिज़नेस मॉड्यूल पर चलते हैं. एक बड़े बजट की बड़े हीरो की फ़िल्म ज़्यादा कमाई करती है. दर्शक एक महिला लीड की फ़िल्म देखने थिएटर में नहीं जाती है. वो महिला प्रधान फ़िल्म की बजाय एक बड़े हीरो की फ़िल्म देखना पसंद करते हैं.”
जब उनपर लगनेवाले मसाला फ़िल्में बनाने के इल्ज़ाम के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होने कहा, “किसी भी निर्देशक को यह नहीं बताया जाना चाहिए कि क्या बनाना है और क्या नहीं बनाना है. मैं अपनी हर फ़िल्म में यह सुनिश्चित करती हूं कि महिलाओं के पास कोई काम हो, न कि वह एक किरदार के तौर पर अपनी शादी हो जाने का इंतज़ार कर रही हो. आप मेरी फ़िल्म में किसी तरह की कोई अश्लीलता भी नहीं पाएंगे.”
आइटम सॉन्ग के बारे में बाते करते हुए फ़राह ख़ान ने कहा, “90 के दशक और 2000 की शुरुआत में हम ऐसे बहुत सारे गाने किया करते थे. जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो अब हमें लगता है कि क्या सचमुच ऐसा कुछ हुआ भी था या नहीं. हम जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं और सीखते हैं, तो आपको इस बात का एहसास होता है कि आपको इस तरह के गाने नहीं करने चाहिए, जहां महिलाओं को ऑब्जेक्टिफ़ाई किया जाता हो. अब हम पहले से ज़्यादा सतर्क हो गये हैं, मगर कई बार ऐसा भी होता है कि छोटी-छोटी बात का बतंगड़ बन जाता है.”
ओम शांति ओम के गाने दीवानगी… के बारे में जब फ़राह ख़ान से पूछा गया कि क्या इस गानर में उन्हें उन कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जिनकी साथ वह करना चाहती थीं, तो इस पर फ़राह ने हंसते हुए कहा, “आमिर ने 10 दिनों तक मुझे पागल बनाए था. आमिर उस वक्त अपनी फ़िल्म तारे ज़मीं पर एडिट कर रहे थे. 4 साल बाद उन्होंने मुझे बताया कि वह इस गाने में काम ही नहीं करना चाहते थे.”
फ़राह बताती हैं, “शाहरुख ख़ान ने मुझे कहा था कि वो दिलीपजी और सायराजी को लेकर आएंगे. मैं आज भी उस दिन का इंतज़ार कर रही हूं.” उन्होंने शरारत भरे अंदाज़ में कहा, “किसी भी काम को किसी मर्द पर नहीं छोड़ना चाहिए”.
अपने आइकॉनिक गाने छैंया छैंया को लेकर फ़राह ख़ान ने कहा, “हमें स्टेशन पर शूट करने की अनुमति नहीं मिल रही थी, तो ऐसे में इस गाने को चलती ट्रेन को ऊपर शूट किया. बिना रिहर्सल हमने 4 दिन में इस गाने की शूटिंग पूरी कर ली थी… और ट्रेन से कोई नीचे गिरा भी नहीं.”
उन्होंने बताया, “हमने शिल्पा शेट्टी से लेकर रवीना टंडन तक इस गाने के लिए सभी को अप्रोच किया था, मगर किसी ने हामी नहीं भरी. मलाइका अरोड़ा ने इस गाने में काम किया और उसके बाद वो एक स्टार बन गयीं. मुझे उस गाने के चलते बहुत सारी अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्मों में काम करने के ऑफ़र मिले… बॉम्बे ड्रीम्स, वैनिटी फ़ेयर और एक चीनी फ़िल्म परहैप्स लव का भी ऑफ़र मिला था.”
उन्होंने कहा, “ओम शांति ओम बनाने का आइडिया बॉम्बे ड्रीम्स के चलते ही आया… इतना ही नहीं, एंड क्रेडिट्स में टेक्नीशियन को इंट्रोड्यूस करने का आइडिया भी बॉम्बे ड्रीम्स से ही आया था.”
आजकल की फ़िल्मों में नाच-गाने के कम इस्तेमाल के बारे में उन्होंने कहा, “आजकल के ज़्यादातर गानों में लिंप-सिंकिंग नहीं होती है. जल्द ही ऐसा भी होगा कि आपके पास नाचने के लिए कोई गाना ही नहीं होगा.”
उन्होंने रीमिक्स गानों के चलन पर कहा, “मैं रीमिक्स गानों से तंग आ चुकी हूं. मैं नहीं जानती हूं कि वो सब ऐसा क्यों कर रहे हैं… यह म्यूज़िक कंपनियों द्वारा गया फ़ैसला है. ये गाने नॉस्टैलजिक होते हैं और जल्द ही लोगों की ज़ुबां पर चढ़ जाते हैं.”
उन्होंने अपने वेब शो बैक बेंचर्स के बारे में भी बात की और कहा, “यह एक क्विज़ शो है.” उन्होंने एक शरारत भरे अंदाज़ में कहा कि शो में आनेवाले सेलिब्रिटी के हिसाब से हम कम मुश्क़िल सवाल भी पूछते हैं.”
आप अगले 5 सालों में क्या कुछ करने की ख़्वाहिश रखती हैं?
“मैं निश्चित तौर पर टॉम क्रूज़ को डांस करवाना चाहती हूं.”
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