मुस्लिम महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर केरल में टीवी डिबेट के बाद गरमाई सियासत, महिला एंकर और पैनलिस्ट पर पुलिस केस दर्ज
दक्षिण भारत के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इन दिनों केरल से सामने आया एक बेहद सनसनीखेज मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। महिलाओं की सार्वजनिक सहभागिता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े एक संवेदनशील बयान पर शुरू हुआ विवाद अब मीडिया, पुलिस और अदालती कार्रवाइयों तक पहुंच चुका है। एक सुन्नी धार्मिक विद्वान की महिलाओं को लेकर दी गई विवादास्पद टिप्पणी पर जब एक प्रमुख मलयालम न्यूज़ चैनल पर लाइव टीवी डिबेट आयोजित की गई, तो स्टूडियो के भीतर और बाहर का माहौल पूरी तरह से गरमा गया। इस बहस के बाद केरल पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न केवल एक प्रमुख टीवी एंकर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है, बल्कि शो के एक पैनलिस्ट के खिलाफ भी कानूनी शिकंजा कसा है। इस घटना के बाद से राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक संवेदनशीलता को लेकर एक तीखी और लंबी बहस छिड़ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम की सुई अगर पीछे घुमाई जाए, तो इसकी शुरुआत केरल के जाने-माने सुन्नी स्कॉलर और धार्मिक गुरु कंथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार के एक बयान से हुई थी। कंथापुरम मुसलियार ने अपने एक संबोधन के दौरान मुस्लिम महिलाओं की सार्वजनिक जीवन में भागीदारी और कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति को लेकर एक सलाह दी थी। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि मुस्लिम महिलाओं को धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान गैर-रिश्तेदार पुरुषों के साथ सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद रहने से बचना चाहिए। उनके इस बयान के सामने आते ही केरल के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के बीच खलबली मच गई। जहां एक तरफ रूढ़िवादी धार्मिक हलकों में इसे सही ठहराया गया, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक और प्रगतिशील विचारधारा वाले लोगों ने इसे महिलाओं के अधिकारों का हनन करार देते हुए इसका पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया।
सुन्नी स्कॉलर के इस बयान पर मचे घमासान के बाद एक प्रमुख मलयालम टेलीविजन चैनल ने इस मुद्दे पर जनता की अदालत में एक लाइव टीवी डिबेट का आयोजन किया। इस डिबेट शो की कमान जानी-मानी पत्रकार और एंकर अपर्णा कुरुप संभाल रही थीं। बहस के दौरान एंकर द्वारा कुछ ऐसी टिप्पणियां और सवाल किए गए, जिन्हें लेकर एक विशेष वर्ग में भारी नाराजगी फैल गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि डिबेट के दौरान एंकर ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले और समाज में तनाव पैदा करने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया। बढ़ते दबाव और विवाद को बढ़ता देख हालांकि संबंधित चैनल और पत्रकार अपर्णा कुरुप ने अपनी उन टिप्पणियों पर सार्वजनिक रूप से खेद भी व्यक्त कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आया और मामला सीधे थाने तक जा पहुंचा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोच्चि सिटी साइबर पुलिस स्टेशन में सोमवार को एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई। यह शिकायत कासरगोड के रहने वाले अब्दुल हकीम बी.एम. नामक व्यक्ति की ओर से दी गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मलयालम टीवी पत्रकार और एंकर अपर्णा कुरुप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, एंकर पर धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाने का प्रयास) और धारा 299 (जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण तरीके से किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि लाइव डिबेट के दौरान किस प्रकार की शब्दावली का इस्तेमाल किया गया था, जिससे समाज के एक वर्ग में इतनी गहरी ठेस पहुंची।
यह विवाद केवल टीवी स्टूडियो तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया के वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर भी इसने भयंकर रूप ले लिया। डिबेट के तुरंत बाद, ‘विजडम स्टूडेंट्स’ संगठन के उपाध्यक्ष अब्दुल्ला बासिल सी.पी. ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। अपने इस वीडियो में बासिल ने आरोप लगाया कि टीवी डिबेट की शुरुआत में जो टिप्पणियां एंकर और अन्य लोगों द्वारा की गईं, वे पूरी तरह से ‘इस्लामोफोबिक’ यानी इस्लाम विरोधी और नफरत फैलाने वाली थीं। इस सोशल मीडिया पोस्ट के वायरल होने के बाद एंकर अपर्णा कुरुप ने भी पलटवार करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने अब्दुल्ला बासिल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भी मानहानि और धमकियों के आरोप में केस दर्ज कर लिया। हालांकि, जैसे ही इस मामले ने तूल पकड़ा, राज्य सरकार ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे बासिल के खिलाफ किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में दंडात्मक कार्रवाई न करें।
इस पूरे प्रकरण ने केरल की मुख्यधारा की राजनीति में भूचाल ला दिया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन सहित राज्य की कई प्रमुख महिला राजनेताओं ने कंथापुरम अबूबकर मुसलियार के उस मूल बयान की खुलकर आलोचना की है, जिसमें महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर न रहने की सलाह दी गई थी। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की दकियानूसी सोच 21वीं सदी के आधुनिक समाज और महिलाओं की स्वतंत्र प्रगति के बिल्कुल खिलाफ है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व (AICC) के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मामले पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी उचित समय आने पर इस पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक और स्पष्ट रुख जनता के सामने रखेगी।
इस पूरे विवाद में केरल के प्रभावशाली राजनीतिक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की एंट्री ने मामले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। IUML के अध्यक्ष पनाक्कड सादिकली शिहाब थंगल ने इस बयान को एक विद्वान का व्यक्तिगत धार्मिक दृष्टिकोण करार दिया है, जिससे पार्टी ने एक तरह से धार्मिक संतुलन साधने की कोशिश की है। हालांकि, दूसरी तरफ मुस्लिम यूथ लीग के जनरल सेक्रेटरी और विधायक पी.के. फिरोस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बताया कि उन्होंने राज्य के गृह मंत्री से मुलाकात कर सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अब्दुल्ला बासिल पर दर्ज किए गए मुकदमे को तुरंत वापस लेने की सख्त मांग की है। विधायक फिरोस ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि उनकी पार्टी समाज में सांप्रदायिक जहर घोलने वालों को बेनकाब करने वाले साहसी युवाओं के खिलाफ किसी भी तरह की दमनकारी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेगी। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर और अधिक तूल पकड़ सकता है।
Comments are closed.