देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से ठीक पहले मौसम ने एक बार फिर भयानक करवट ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम और उससे सटी पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र और गहरा होकर एक सशक्त डिप्रेशन (Depression) में तब्दील हो गया है। यह मानसूनी तंत्र दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटों से टकराते हुए पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मौसमी सिस्टम अगले 4 से 5 दिनों के दौरान ओडिशा और छत्तीसगढ़ को पार करते हुए पूरे मध्य प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, गुजरात और उत्तरी महाराष्ट्र तक पहुंचेगा। इसके प्रभाव से देश के आधे हिस्से में तेज तूफानी हवाओं के साथ अति भारी वर्षा का नया दौर शुरू हो गया है।
बंगाल की खाड़ी में उठे इस तूफान का पहला और सबसे घातक प्रहार ओडिशा और सीमावर्ती आंध्र प्रदेश पर हुआ है:
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200 मिमी से ज्यादा बारिश की आशंका: मौसम विभाग ने ओडिशा के कई जिलों (मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, कालाहांडी और गंजम) में अत्यधिक भारी बारिश के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां 24 घंटे में 200 मिमी से अधिक पानी बरसने से अचानक बाढ़ (Flash Floods) की स्थिति बन सकती है।
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समुद्र में 65-70 किमी की रफ्तार से हवाएं: तटीय इलाकों में 50 से 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल रही हैं। समुद्र के अशांत होने के चलते मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र तट से दूर रहने और नावों को वापस लाने की सख्त हिदायत दी है।
डिप्रेशन जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, मध्य भारत में बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं:
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मध्य प्रदेश: आईएमडी ने 12 से 14 सितंबर के दौरान पूरे मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। नर्मदा, चंबल, बेतवा और क्षिप्रा जैसी प्रमुख नदियां पहले से ही लबालब हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, होशंगाबाद, सागर और ग्वालियर संभाग में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिससे कई बड़े बांधों के गेट दोबारा खोलने पड़ सकते हैं।
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छत्तीसगढ़: बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और रायपुर सहित दक्षिणी और मध्य जिलों में भारी जलभराव और भूस्खलन को लेकर प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
इस वेदर सिस्टम का पश्चिमी सिरा गुजरात और राजस्थान को भी प्रभावित करेगा:
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गुजरात: सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात (सूरत, वलसाड, नवसारी) में चक्रवाती परिसंचरण के चलते मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।
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पूर्वी राजस्थान: कोटा, बारां, झालावाड़ और उदयपुर संभाग में 13 से 15 सितंबर के बीच मूसलाधार बारिश दर्ज हो सकती है।
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महाराष्ट्र (विदर्भ और कोंकण): विदर्भ के जिलों और उत्तरी महाराष्ट्र में आकाशीय बिजली चमकने और 50 किमी/घंटा की आंधी के साथ भारी बौछारें पड़ने की संभावना है।
इस सिस्टम के साथ-साथ एक मानसूनी ट्रफ लाइन भी गुजर रही है, जिसके चलते पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी व्यापक वर्षा की चेतावनी दी गई है:
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पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय जिलों और झारखंड में तेज मेघगर्जन के साथ भारी बारिश का येलो अलर्ट है।
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बिहार और पूर्वी यूपी में आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन ने किसानों और चरवाहों को खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लेने की अपील की है।
मौसम विभाग ने प्रभावित राज्यों के स्थानीय प्रशासन को जलभराव, सड़क संपर्क टूटने और कच्चे मकानों को होने वाले संभावित नुकसान से निपटने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ की टीमों को मुस्तैद रखने के निर्देश दिए हैं।
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