चमोली में 10 सड़कें बंद, बद्रीनाथ-हेमकुंड में बर्फबारी; IMD ने 14 सितंबर तक जारी किया भारी बारिश का अलर्ट
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी मौसम के तेवर एक बार फिर बेहद तल्ख हो गए हैं। राज्य में कुदरत का दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां बद्रीनाथ धाम, नीलकंठ पर्वत और हेमकुंड साहिब की ऊंची चोटियों पर समय से पहले हुई ताजा बर्फबारी ने दस्तक देकर ठिठुरन बढ़ा दी है, वहीं दूसरी तरफ निचले और मध्य हिमालयी जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पहाड़ी इलाकों में लगातार दरकते पहाड़ों और बोल्डर गिरने की घटनाओं से कई प्रमुख मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के देहरादून केंद्र ने मौसम की गंभीरता को देखते हुए 11 सितंबर से 14 सितंबर 2026 तक राज्य के कई संवेदनशील पहाड़ी जिलों में भारी बारिश, तेज गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने का येलो अलर्ट जारी किया है। आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन को लगातार हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
सीमांत जनपद चमोली में मूसलाधार बारिश के बाद पहाड़ों से आए भारी मलबे और पत्थरों के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई है:
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10 सड़कें पूरी तरह बंद: जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश और बोल्डर गिरने से जिले के 10 ग्रामीण संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे दर्जनों गांवों का तहसील और जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है।
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राहत व बहाली कार्य में रुकावट: लोक निर्माण विभाग (PWD) और बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) की टीमें भारी जेसीबी और पोकलेन मशीनों के साथ लगातार मलबा हटाने में जुटी हुई हैं। हालांकि, पहाड़ी से लगातार गिर रहे छोटे-बड़े बोल्डर्स और रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश के कारण मार्ग बहाली के काम में गंभीर खतरे और रुकावटें आ रही हैं।
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ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की बढ़ी परेशानी: सड़कें बंद होने से दूध, सब्जी और रोजमर्रा की जरूरी सामग्री की आपूर्ति प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों को पहाड़ी पगडंडियों के जरिए जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के दैनिक पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले चार दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का यह सिलसिला थमने वाला नहीं है:
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11 सितंबर (आज का अलर्ट): देहरादून, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ सहित 7 प्रमुख जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का येलो अलर्ट है। प्रदेश के सभी 13 जिलों में हल्की से मध्यम दर्जे की तेज बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
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12 सितंबर: देहरादून, बागेश्वर और उत्तरकाशी जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
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13 और 14 सितंबर: बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश होने के प्रबल आसार हैं, जबकि अन्य मैदानी व पहाड़ी जिलों में बादल छाए रहने के साथ रुक-रुक कर बौछारें गिरेंगी।
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मैदानी इलाकों का मिजाज: हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और राजधानी देहरादून के मैदानी इलाकों में तेज हवाओं और गरज के साथ बारिश होगी, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी और उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी।
पहाड़ों में लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण अलकनंदा, मंदाकिनी, धौलीगंगा, पिंडर और कोसी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और वे चेतावनी रेखा के आसपास बह रही हैं। प्रशासन ने नदी तटों के पास रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की ताकीद की है।
उत्तराखंड पुलिस और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों के लिए विशेष सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग के ‘नाउकास्ट’ बुलेटिन तथा पुलिस कंट्रोल रूम से सड़क की ताजा स्थिति जानकर ही आगे बढ़ें।
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भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और डेंजर जोन में रात के समय वाहन चलाने से पूरी तरह परहेज करें।
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पहाड़ों में अचानक बोल्डर गिरने की आशंका वाले स्थानों पर रुकने या सेल्फी लेने की गलती बिल्कुल न करें।
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किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में तुरंत राज्य आपदा कंट्रोल रूम (1070) या पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर संपर्क करें।
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