सोशल मीडिया की चकाचौंध के पीछे छिपी रंजिश और दरिंदगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। चर्चित डिजिटल क्रिएटर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मंजीत कौर की नृशंस हत्या की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) और पुलिस के हाथ ऐसे चौंकाने वाले सुराग लगे हैं, जिससे पूरे केस की दिशा ही बदल गई है।
शुरुआती जांच में इसे जहां एक सुनसान इलाके में हुई त्वरित हत्या माना जा रहा था, वहीं अब फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल फुटप्रिंट्स और मुख्य आरोपियों की रिमांड पूछताछ से यह साफ हो गया है कि यह पूरी वारदात एक सोची-समझी आपराधिक साजिश (Pre-Planned Conspiracy) का नतीजा थी। पीड़िता का पहले योजनाबद्ध तरीके से अपहरण किया गया, जिसके बाद उसे घंटों बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया और फिर साक्ष्य मिटाने के लिए जिंदा जला दिया गया।
इस हत्याकांड का सबसे सनसनीखेज पहलू क्राइम सीन को लेकर सामने आया नया खुलासा है:
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शुरुआती कहानी की हवा निकली: वारदात के पहले दिन जिस हाईवे किनारे या सुनसान झाड़ियों में अधजला शव बरामद हुआ था, पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि हत्या वहां नहीं हुई थी। वह केवल ‘डंपिंग यार्ड’ था, जहां सबूत नष्ट करने के मकसद से शव को लाया गया था।
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असली क्राइम सीन कोई दूसरा ठिकाना: जांच एजेंसियों को मिले इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और आरोपियों की मोबाइल टावर लोकेशन के मुताबिक, मंजीत को शहर के बीचो-बीच स्थित एक किराए के फ्लैट या निजी फॉर्महाउस में बंधक बनाकर रखा गया था।
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खून के धब्बे और संघर्ष के निशान: फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की टीम ने प्राथमिक घटनास्थल से खून के नमूने, टूटी चूड़ियां, बालों के गुच्छे और संघर्ष के निशान जुटाए हैं। सूत्रों के अनुसार, हत्यारों ने वारदात को अंजाम देने के बाद उस कमरे को केमिकल और पानी से धोकर साफ करने की कोशिश की थी, लेकिन अत्याधुनिक ल्यूमिनोल टेस्ट (Luminol Test) में खून के गहरे निशान उजागर हो गए।
जांच में शामिल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह वारदात किसी एक व्यक्ति का काम नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह द्वारा अंजाम दी गई है:
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प्लानिंग के तहत किडनैपिंग: मंजीत को किसी प्रोजेक्ट, शूट या पुराने परिचित के बहाने एक तय जगह पर बुलाया गया था। वहां पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने जबरन उसे कार में खींचा और उसका मोबाइल तुरंत स्विच ऑफ कर दिया।
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घंटों तक बेरहमी से टॉर्चर: मेडिकल और पोस्टमार्टम की शुरुआती राय के अनुसार, पीड़िता के शरीर पर लाठी-डंडों, धारदार हथियारों और भारी ब्लंट ऑब्जेक्ट से वार के गंभीर निशान मिले हैं। पसलियों और सिर पर गहरी चोटें थीं, जिससे संकेत मिलता है कि हत्यारों ने मरने से पहले उससे कुछ कबूलवाने या डिजिटल पासवर्ड हासिल करने के लिए घंटों बर्बर यातनाएं दीं।
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जिंदा जलाने की खौफनाक पुष्टि: पोस्टमार्टम के प्रारंभिक विसरा और लंग्स (फेफड़ों) की जांच में कार्बन पार्टिकल्स (कालिख) मिलने के संकेत मिले हैं, जिसका सीधा अर्थ यह होता है कि जब पीड़िता को आग के हवाले किया गया, तब उसकी सांसें चल रही थीं। आरोपियों ने पहचान मिटाने के लिए पेट्रोल या ज्वलनशील पदार्थ का छिड़काव किया था।
पुलिस ने इस मामले में मंजीत के बेहद करीबी रहे दो संदिग्धों समेत कुल चार लोगों को हिरासत में लिया है:
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वित्तीय लेन-देन और ब्लैकमेलिंग का शक: सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया से होने वाली मोटी कमाई, ब्रांड डील्स और कुछ निजी वीडियोज को लेकर पीड़िता और मुख्य संदिग्ध के बीच पिछले कुछ महीनों से गहरा विवाद चल रहा था।
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कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) से मिला सुराग: घटना से ठीक पहले पीड़िता के फोन पर आए अंतिम कॉल और संदिग्धों के लोकेशन डेटा आपस में मेल खा रहे हैं। पुलिस अब आरोपियों के व्हाट्सएप चैट्स, डिलीट किए गए मैसेज और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच करा रही है ताकि मनी ट्रेल और सुपारी किलिंग (Contract Killing) के एंगल को भी पुख्ता किया जा सके।
जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच टीम के पास वैज्ञानिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों की मजबूत चेन मौजूद है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ हत्या (धारा 103 बीएनएस / 302 आईपीसी), अपहरण, सबूत मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र की सख्त धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की जाएगी। प्रशासन इस पूरे मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराकर आरोपियों को फांसी जैसी सख्त सजा दिलाने की तैयारी में है।
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