मई-जून 2027 में ट्रैक पर उतरेगा स्वदेशी प्रोटोटाइप; बॉडी फ्रेम का ‘स्क्वीज टेस्ट’ शुरू, वडोदरा से मुंबई सिर्फ डेढ़ घंटे में
देश के सबसे महत्वाकांक्षी 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से एक महत्वपूर्ण प्रगति रिपोर्ट सामने आई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वडोदरा में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि भारत में निर्मित हो रही पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का बॉडी फ्रेम पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है और इसे स्ट्रक्चरल वैलिडेशन के लिए ‘स्क्वीज टेस्ट’ (Squeeze Test) हेतु भेज दिया गया है। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के तहत तैयार हो रही यह हाई-स्पीड ट्रेन मई या जून 2027 तक परीक्षण के लिए पटरियों पर उतार दी जाएगी।
हाई-स्पीड रेल इंजीनियरिंग में ‘स्क्वीज टेस्ट’ किसी भी ट्रेन कोच के निर्माण का सबसे अहम और अनिवार्य सुरक्षा परीक्षण माना जाता है।
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दबाव सहने की क्षमता की जांच: इस टेस्ट के तहत ट्रेन के धातुई बॉडी फ्रेम (Shell) पर दोनों सिरों से हाइड्रोलिक जैक द्वारा भारी कंप्रेसिव लोड (सैकड़ों टन का अत्यधिक दबाव) डाला जाता है।
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क्रैश सेफ्टी और मजबूती: यह टेस्ट यह सुनिश्चित करता है कि 250 से 320 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ते समय यदि कोई आपात स्थिति, तेज हवा का झटका या अप्रत्याशित टकराव होता है, तो ट्रेन का डिब्बा बिना मुड़े या पिचके उस भारी दबाव को सुरक्षित झेल सके।
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इस स्ट्रक्चरल टेस्ट में सफल होने के बाद ही बोगियों के भीतर इंटीरियर, वायरिंग, ट्रैक्शन मोटर और एयर-कंडीशनिंग सिस्टम फिट किए जाते हैं।
स्वदेशी तकनीक से बीईएमएल (BEML) द्वारा तैयार की जा रही इस 8-कोच वाली ट्रेन की ऑपरेशनल स्पीड लगभग 250 से 280 किमी/घंटा रखी गई है। रेल मंत्री ने समय-सीमा स्पष्ट करते हुए कहा कि:
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ट्रैक ट्रायल: मई या जून 2027 में पूरी ट्रेन का प्रोटोटाइप ट्रैक पर उतारा जाएगा।
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रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) ट्रायल: दो से चार महीने तक इसके डायनामिक और ऑसिलेशन ट्रायल्स चलेंगे।
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पीएम द्वारा उद्घाटन: सफल परीक्षण के बाद 2027 की दूसरी छमाही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस ट्रेन का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।
रेल मंत्री ने परियोजना के ट्रैक और सिविल निर्माण की रफ्तार पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि गुजरात के भीतर सूरत से वापी के बीच का सेक्शन दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
सरकार की योजना पूरे 508 किलोमीटर लंबे ट्रैक का एक साथ इंतजार करने के बजाय इसे चरणों (Phases) में चालू करने की है।
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सबसे पहले सूरत-बिलिमोरा (लगभग 50 किमी) के ट्रायल स्ट्रेच पर कमर्शियल परिचालन शुरू किया जाएगा।
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इसके बाद सेवा का विस्तार सूरत से वापी (लगभग 100 किमी), फिर अहमदाबाद और अंत में मुंबई तक किया जाएगा।
अश्विनी वैष्णव ने परियोजना के सामाजिक और आर्थिक फायदों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बुलेट ट्रेन के पूर्ण रूप से चालू होने के बाद वडोदरा से मुंबई की दूरी मात्र 1 घंटा 30 मिनट (डेढ़ घंटे) में तय की जा सकेगी, जिसमें अभी सामान्य ट्रेनों से 5 से 6 घंटे लगते हैं। ट्रेन में वर्ल्ड क्लास सुविधाएं होंगी, जिनमें 360-डिग्री घूमने वाली रिक्लाइनिंग सीटें, उन्नत इन्फोटेनमेंट सिस्टम, दिव्यांगजनों के लिए विशेष अनुकूलित कोच और ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल शामिल रहेंगे। आधुनिक सिग्नलिंग और भूकंप-रोधी सेंसर्स से लैस यह हाई-स्पीड नेटवर्क भारत के परिवहन ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रहा है।
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