करीब एक घंटे चली सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार की भूमिका पर सख्त टिप्पणी करते हुए प्रमोशन रोके जाने को अनुचित माना
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सीएटी Central Administrative Tribunal की जयपुर बेंच ने IPS पंकज चौधरी की प्रमोशन याचिका पर सुनवाई पूरी की
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DIG रैंक के साथ सभी पेंडिंग प्रमोशन और उससे जुड़ी सुविधाएं देने के निर्देश
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वकील ने राज्य सरकार पर वर्षों तक जानबूझकर प्रमोशन रोके रखने का आरोप लगाया
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कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही का भी कोर्ट में जिक्र
समग्र समाचार सेवा
जयपुर | 19 दिसंबर: सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की जयपुर बेंच ने एक अहम फैसले में पंकज चौधरी को बड़ी राहत देते हुए उनके DIG (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) पद से जुड़े सभी लंबित प्रमोशन और सुविधाएं देने का निर्देश दिया है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले में करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखते हुए राज्य सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सुनवाई के दौरान पंकज चौधरी के अधिवक्ता अनुपम अग्रवाल ने कोर्ट के समक्ष क्रॉस-एग्जामिनेशन पूरा करते हुए उन सैकड़ों अधिकारियों का ब्यौरा रखा, जो पूर्व में एसीबी मामलों में फंसाए गए थे। उन्होंने दलील दी कि कई अधिकारियों को राज्य सरकार ने फर्जी एनकाउंटर मामलों के आरोपियों के साथ जेल भेजा, जबकि बाद में वही अधिकारी प्रमोशन पा गए। इसके उलट, पंकज चौधरी का प्रमोशन वर्षों तक जानबूझकर रोका गया।
अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कार्मिक विभाग, मुख्य सचिव कार्यालय और गृह विभाग के कुछ पहचाने गए अधिकारियों ने मामले को उलझाए रखा और कोर्ट के पूर्व आदेशों की अनदेखी की। इसी क्रम में केंद्रीय गृह सचिव, यूपीएससी सचिव और राजस्थान के मुख्य सचिव सहित कई अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही का भी उल्लेख कोर्ट में किया गया।
फैसले के बाद आईपीएस पंकज चौधरी ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में समय भले लगता हो, लेकिन सच को हराया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि राजस्थान के करोड़ों लोग उनके नाम के साथ ईमानदारी, साहस और निडरता की छवि जोड़ते हैं। संगठित असमानता, यातना और उत्पीड़न के बावजूद अंततः न्याय की जीत हुई, जो राजस्थान के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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