रजनीकांत का थलापति विजय की पार्टी के नेता को करारा जवाब, कहा समय बोलता नहीं, इंतजार करता है’:

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News India Live, Digital Desk: थलापति विजय की पार्टी TVK के महासचिव आधव अर्जुन के एक बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल ला दिया था। अब रजनीकांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तमिल में एक नोट साझा कर इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

1. क्या था TVK नेता का विवादित बयान?

12 मार्च को एक प्रदर्शन के दौरान आधव अर्जुन ने दावा किया था कि:

रजनीकांत 2020-21 में राजनीति में प्रवेश करना चाहते थे, लेकिन सत्तारूढ़ DMK (द्रमुक) परिवार ने उन्हें डराया और धमकाया था।

अर्जुन ने कहा था कि रजनीकांत में दबाव झेलने की “मानसिक शक्ति” नहीं थी, जबकि विजय में वह साहस है।

2. रजनीकांत की ‘शक्तिशाली’ प्रतिक्रिया

रजनीकांत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए लिखा:

तथ्यों के विपरीत: “आधव अर्जुन द्वारा दी गई राय सच्चाई से कोसों दूर है। यह केवल मुझे बदनाम करने की कोशिश है।”

प्रसिद्ध मुहावरा: उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में लिखा— “समय बोलता नहीं है, बल्कि वह इंतजार करता है और सही जवाब देता है।”

समर्थकों का आभार: रजनीकांत ने उन सभी राजनीतिक नेताओं (EPS, अन्नामलाई, थोल थिरुमावलवन आदि) और प्रशंसकों को धन्यवाद दिया जिन्होंने इस अपमानजनक बयान की निंदा की और उनके पक्ष में खड़े हुए।

3. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

DMK का रुख: तमिलनाडु के मंत्री एस. रघुपति ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रजनीकांत और DMK के संबंध हमेशा मैत्रीपूर्ण रहे हैं। उन्होंने TVK पर ‘झूठ के सहारे राजनीतिक माइलेज’ लेने का आरोप लगाया।

AIADMK और BJP: विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने भी रजनीकांत का समर्थन किया और कहा कि राजनीति में रहने या न रहने का फैसला रजनीकांत का व्यक्तिगत अधिकार था, जिसका सम्मान होना चाहिए।

4. रजनीकांत ने क्यों छोड़ी थी राजनीति?

रजनीकांत ने अपने बयान में स्पष्ट किया (और उनके प्रशंसकों ने भी याद दिलाया) कि उन्होंने 2021 में राजनीति से पीछे हटने का फैसला स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और कोविड-19 महामारी के जोखिम के कारण लिया था, न कि किसी बाहरी दबाव में।

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