नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन की तबाही के बीच संकटमोचक बना भारत, बड़े राहत पैकेज की तैयारी India becomes a savior amid the devastation caused by floods and landslides in Nepal, preparing a major relief package.

पड़ोसी देश नेपाल इस समय प्रकृति के भीषण प्रकोप का सामना कर रहा है, जहां लगातार मूसलाधार बारिश के बाद आई बाढ़ और भयंकर भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। ऐसे में एक बार फिर भारत ने अपने ‘पड़ोसी पहले’ (Neighbourhood First) की नीति को साबित करते हुए संकट की इस घड़ी में नेपाल के लिए एक बड़े राहत पैकेज पर विचार करना शुरू कर दिया है। नेपाल के कई हिस्सों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो चुका है और लोग बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस कठिन समय में नई दिल्ली ने बिना एक पल गंवाए अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए राहत सामग्री, बचाव दल और तकनीकी विशेषज्ञों को भेजना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से टेलीफोन पर बातचीत की थी और उन्हें हरसंभव सहायता देने का पूरा भरोसा दिलाया था, जिसके बाद से लगातार युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य जारी हैं।

68.5 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें काठमांडू रवाना

भारतीय वायुसेना के विमान लगातार राहत और बचाव सामग्री लेकर काठमांडू के लिए उड़ान भर रहे हैं। अब तक भारतीय वायुसेना की कई उड़ानों के जरिए लगभग 68.5 टन से अधिक आवश्यक राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है। इस राहत सामग्री में आपदा प्रभावितों के लिए तंबू, गर्म कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, स्वच्छता किट (Hygiene Kits), सोलर लैंप, जीवन रक्षक दवाइयां, रेडी-टू-ईट खाद्य पैकेट, जनरेटर, पानी को शुद्ध करने वाली गोलियां और जल निकासी के लिए आधुनिक पंप शामिल हैं। केवल भौतिक सामान ही नहीं, बल्कि भारत ने अपने सबसे अनुभवी विशेषज्ञों के दलों को भी नेपाल की मदद के लिए मैदान में उतार दिया है। त्रिशुली जिले में कई पनबिजली परियोजनाएं इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और आशंका जताई जा रही है कि इन परियोजनाओं की सुरंगों में बड़ी संख्या में कर्मचारी फंसे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना और एनडीआरएफ के विशेष बचाव दलों के साथ-साथ डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश करने वाली तकनीकी टीमें और डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा गया है ताकि जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जा सके।

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और संपर्क मार्गों की बहाली के लिए बेली ब्रिज

आपदा के कारण नेपाल के कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग और पुल पूरी तरह से टूट चुके हैं, जिससे राहत कार्यों में बड़ी बाधा आ रही है। इस समस्या से निपटने के लिए भारत ने सड़कों और मार्गों को तुरंत बहाल करने वास्ते बेली ब्रिज का सामान और उसके निर्माण से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों का दल भी नेपाल भेज दिया है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत इस समय पूरी तरह से मानवीय सहायता, चिकित्सा मदद और त्वरित बचाव सहयोग देने पर केंद्रित है। नेपाल के आपदा प्रभावित इलाकों से अब तक लगभग 149 भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है और सरकार द्वारा उनके नामों की सूची भी सोशल मीडिया पर साझा कर दी गई है ताकि उनके स्वजन चिंता मुक्त हो सकें। जैसे ही नुकसान का पूरा आकलन सामने आ जाएगा और काठमांडू की तरफ से औपचारिक मांग रखी जाएगी, उसके बाद एक बड़े वित्तीय और पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा किए जाने की पूरी संभावना है।

वर्ष 2015 के भूकंप की यादें और ‘ऑपरेशन मैत्री’ की तर्ज पर हो रही मदद

यह कोई पहला मौका नहीं है जब भारत ने संकट में फंसे नेपाल की इतने बड़े पैमाने पर बांहें फैलाकर मदद की हो। इससे पहले वर्ष 2015 में जब नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था, तब भी भारत सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाने वाला देश था और उसने ‘ऑपरेशन मैत्री’ के तहत राहत और बचाव कार्यों का एक ऐतिहासिक अभियान चलाया था। उस दौरान भारत ने भूकंप से राहत के तौर पर एक अरब डॉलर की वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण का कार्य भी किया था ताकि नेपाल के लोगों को फिर से उनके पैरों पर खड़ा किया जा सके। इसके अलावा अन्य विकास परियोजनाओं के लिए भी एक अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता दी गई थी। इस बार भी स्थिति वैसी ही गंभीर है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से वापस लौटते ही इस बड़े राहत पैकेज और पुनर्वास योजना को लेकर अंतिम और बड़ा फैसला लिया जा सकता है। भारत सरकार का यह कदम दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, सामाजिक और रणनीतिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करने का काम कर रहा है।

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