धीरेंद्र शास्त्री का कोलकाता में बड़ा संदेश: “देश को जोड़ने वाली सनातनी सोच चाहिए, लड़ाने वाली तनातनी नहीं”
कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
-
कोलकाता में श्रद्धालुओं ने एकसाथ गीता का पाठ कर आध्यात्मिक माहौल बनाया
-
राज्यपाल बोले, युवा पीढ़ी का ग्रंथों से जुड़ना राष्ट्र के लिए शुभ संकेत
-
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, राम पर अपमानजनक टिप्पणी किसी हाल में स्वीकार नहीं
-
बेलडांगा में रखी बाबरी मॉडल मस्जिद की नींव पर भी मंच से प्रतिक्रियाएँ
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता | 7 दिसंबर: कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में रविवार को हुआ गीता पाठ, संख्या और उत्साह दोनों के लिहाज़ से बेहद बड़ा धार्मिक आयोजन बन गया। मंच पर राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस, योग गुरु बाबा रामदेव और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री समेत कई संत मौजूद थे, जबकि मैदान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी।
कार्यक्रम में गीता के प्रथम, नवम और अठारहवें अध्याय का सामूहिक पाठ किया गया। राज्यपाल ने युवाओं के ग्रंथों की ओर बढ़ते रुझान को “राष्ट्र की नई ऊर्जा” बताया।
भीड़ को संबोधित करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत की ताकत उसकी सनातन परंपरा में बसती है।
उन्होंने कहा—
“हम ऐसा भारत चाहते हैं जो जोड़े, न कि तोड़े। हमारे समाज में सनातनी भावना होनी चाहिए, तनातनी नहीं।”
साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक मान्यताओं को लेकर किसी की व्यक्तिगत आस्था पर आपत्ति नहीं, पर भगवान राम के बारे में कटु टिप्पणी करने वालों की आलोचना की।
इस आयोजन की टाइमिंग चर्चा में इसलिए आई क्योंकि इसके ठीक एक दिन पहले मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के मॉडल पर आधारित निर्माण की आधारशिला रखी गई थी। वहां भारी भीड़ उमड़ी थी और प्रतीकात्मक ईंट लेकर लोग शामिल हुए थे। इसी वजह से कोलकाता के कार्यक्रम को उससे जोड़कर देखा जा रहा है।
शास्त्री ने कहा कि भारत की शांति और दिशा तभी मजबूत होगी जब समाज एकता की राह चुनेगा।
कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Comments are closed.