तेल अवीव/तेहरान, 12 मार्च 2026 । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Iran ने संकेत दिया है कि India के जहाजों को Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है। इस दावे के सामने आने के बाद भारत के ऊर्जा और व्यापारिक हितों को लेकर राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
अमेरिका-इजराइल और ईरान में 13 दिन से जारी जंग के बीच भी भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर सकेंगे। ईरान सरकार ने इसकी इजाजत दे दी है। यह जानकारी न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से दी है। हालांकि रॉयटर्स ने एक ईरानी सोर्स के हवाले से कहा कि इस तरह की कोई छूट नहीं दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक जो जहाज अमेरिका और इजराइल जुड़े नहीं हैं, उन्हें इस रास्ते से गुजरने दिया जाएगा। इसी वजह से फिलहाल भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया गया है। इससे पहले ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले शिप्स पर हमले की धमकी दी थी।
वहीं, ईरान ने बुधवार रात फारस की खाड़ी में ‘सेफसी विष्णु’ नाम के एक अमेरिकी तेल टैंकर (जहाज) पर हमला किया। इसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। फिलहाल मारे गए भारतीय नागरिक की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हमले में आत्मघाती नाव (सुसाइड बोट) का इस्तेमाल किया गया। जहाज पर मौजूद बाकी 27 लोग सुरक्षित बचा लिए गए। ये जहाज मार्शल आइलैंड के झंडे के तहत चल रहा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में इस मार्ग की सुरक्षा और आवाजाही की अनुमति कई देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। इसलिए यदि भारतीय जहाजों को इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति मिलती है तो इससे तेल और गैस की आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
हाल के समय में क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण इस मार्ग को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई थी। कई देशों ने अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता भी बढ़ाई थी। इसी पृष्ठभूमि में ईरान की ओर से भारतीय जहाजों के लिए अनुमति की खबर को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू होती है तो इससे भारत के व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को स्थिरता मिल सकती है। हालांकि इस विषय पर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत पुष्टि और स्पष्ट दिशा-निर्देश आने का इंतजार किया जा रहा है।
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