ट्रेन या मछली बाजार? रात में फुल वॉल्यूम पर रील्स और सुबह 4:30 बजे लाइट ऑन; सह-यात्री की बदतमीजी पर भड़का सोशल मीडिया!

भारतीय रेलवे (Indian Railways) में सफर का आनंद तब तक ही लिया जा सकता है, जब तक आपके आस-पास बैठे सह-यात्री समझदार और तमीजदार हों. सोचिए, आप एक लंबे और थका देने वाले ओवरनाइट सफर के बाद ट्रेन की बोगी में सुकून से सोने की कोशिश कर रहे हों और अचानक कोई पैसेंजर आधी रात को मोबाइल पर फुल वॉल्यूम में रील्स (Reels) या शॉर्ट वीडियो बजाना शुरू कर दे. ऐसा ही एक बेहद परेशान करने वाला और सिरदर्द पैदा करने वाला वाकया इन दिनों इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है. एक महिला की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत से तंग आकर एक सह-यात्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर अपनी भड़ास निकाली है, जिसके बाद इंटरनेट पर भारतीयों में ‘सिविक सेंस’ (Civic Sense) की कमी को लेकर एक नई और तीखी बहस छिड़ गई है.

‘सुहाने सफर में विलेन बनी महिला’: सह-यात्री ने रेडिट पर खोला दुखों का पिटारा

एक परेशान रेल यात्री ने रेडिट के एक कम्युनिटी फोरम पर अपने इस बेहद खराब और थका देने वाले सफर का पूरा कच्चा चिट्ठा साझा किया है. यात्री ने बताया कि वह जिस थर्ड एसी (3AC) कोच में सफर कर रहा था, वहां शुरुआत में सब कुछ बेहद शांत और व्यवस्थित था. रात के वक्त लगभग सभी लोग आराम से सो चुके थे और बोगी में मौजूद छोटे बच्चे भी कोई शोर नहीं मचा रहे थे. लेकिन बोगी का यह सुकून ज्यादा देर तक नहीं टिक सका.

कोच में एक महिला अपने पति और बच्चे के साथ सफर कर रही थी. यात्री ने लिखा कि उस महिला में बुनियादी सामाजिक समझ (Civic Sense) नाम की कोई चीज नहीं थी. वह शुरुआत से ही बेहद चिड़चिड़े स्वभाव में छोटी-छोटी बातों पर अपने पति से बोगी के बीच कटकट और बहस कर रही थी.

आधी रात को फुल आवाज में रील्स: सबका सिरदर्द बनी महिला की जिद

यात्री के मुताबिक, महिला का पति और बच्चा ऊपर की बर्थ पर सो रहे थे, जबकि महिला को साइड अपर बर्थ मिली हुई थी. बिना किसी ठोस वजह के उसने आधी रात को अपने पति से सीट बदलने की जिद पकड़ ली और बोगी में हंगामा खड़ा कर दिया. पति के सीट बदलने के बाद जो हुआ, उसने पूरे कोच के पैसेंजर्स का जीना मुहाल कर दिया. सीट पर बैठते ही महिला ने आधी रात के सन्नाटे में अपने स्मार्टफोन पर बिना ईयरफोन (Earphones) लगाए, फुल आवाज में फेसबुक और इंस्टाग्राम की रील्स देखना शुरू कर दिया. मोबाइल की तेज आवाज और लगातार बदलती रील्स के शोर के कारण आस-पास की सीटों पर सो रहे लोगों की नींद पूरी तरह खराब हो गई.

परेशानी का क्लाइमेक्स: सुबह 4:30 बजे जबरन जला दी बोगी की लाइट!

सह-यात्रियों की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि सुबह होते-होते यह और ज्यादा बढ़ गई. वह महिला रात में सिर्फ 3-4 घंटे ही सोई और सुबह ठीक 4:30 बजे उठकर बैठ गई. उठते ही उसने फिर से कोच के एसी की कूलिंग और बाकी इंतजामों को लेकर अपने पति से बोगी में जोर-जोर से बहस शुरू कर दी. हद तो तब हो गई जब उसने बिना सोचे-समझे पूरे कंपार्टमेंट की मेन लाइट ऑन कर दी, जबकि बाहर अंधेरा था और बाकी सभी पैसेंजर्स गहरी नींद में थे.

जब उसके खुद के पति और अन्य सह-यात्रियों ने उससे बेहद तमीज और शालीनता से लाइट बंद करने का अनुरोध किया, तो वह उन पर ही भड़क गई और बड़बड़ाने लगी. उसने साफ मना करते हुए लाइट बंद नहीं की, जिससे बोगी में मौजूद लोग बेहद असहज हो गए.

‘इतनी ही दिक्कत है तो प्राइवेट जेट खरीद लो’: रेडिट पोस्ट पर फूटा लोगों का गुस्सा

परेशान यात्री ने गुस्से में अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे गंवार और बदतमीज लोगों को ट्रेन में कन्फर्म टिकट कैसे मिल जाता है. अगर आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट में आम लोगों के साथ तालमेल बिठाने में इतनी ही दिक्कत है, तो अपना प्राइवेट जेट खरीद कर उससे सफर किया करो. जब जेब में पैसा नहीं है तो एटीट्यूड भी उसी हिसाब से मर्यादित रखना चाहिए.” यात्री ने तंज कसते हुए आगे लिखा कि उस बोगी में सफर कर रहे छोटे बच्चे उस महिला से कहीं ज्यादा समझदार और मैच्योर थे, जो कम से कम दूसरों की शांति का ध्यान रख रहे थे.

इस रेडिट पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और लोग रेलवे में ऐसे यात्रियों के खिलाफ कड़े एक्शन की मांग कर रहे हैं. कमेंट सेक्शन में एक यूजर ने अपना दुखड़ा रोते हुए लिखा, “मैं भी आज एक ट्रेन से सफर कर रहा हूं और मेरे बगल वाली फैमिली सुबह 4 बजे उठकर मोबाइल पर जोर-जोर से लाउडस्पीकर में भजन बजा रही है. जब मैंने उन्हें टोकने की हिम्मत की, तो वे बोले कि पूरी दुनिया जाग गई है, तुम कितने आलसी हो जो अब तक सो रहे हो.” वहीं, एक अन्य यूजर ने तीखा तंज कसते हुए लिखा, “कुछ लोगों को लगता है कि पूरी भारतीय रेलवे उनके बाप की जागीर है. चाहे बस हो, ट्रेन हो या फ्लाइट—आप कुछ भारतीयों के साथ कभी भी शांति और सुकून से सफर की उम्मीद नहीं कर सकते.”

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