गंगा में इफ्तार पार्टी पर बवाल चिकन के टुकड़े नदी में फेंकने का आरोप, काशी के संतों ने जताई आपत्ति:

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News India Live, Digital Desk:  काशी, जो अपनी पवित्रता और मां गंगा के प्रति अगाध श्रद्धा के लिए जानी जाती है, वहां चलती नाव पर इफ्तार पार्टी के आयोजन ने विवाद का रूप ले लिया है। मामला केवल पार्टी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गंगा की पवित्रता के उल्लंघन के आरोपों ने इसे और गंभीर बना दिया है।

1. क्या है पूरा विवाद?

नाव पर पार्टी: रमजान के मौके पर कुछ लोगों द्वारा गंगा के बीचों-बीच बजरे (बड़ी नाव) पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया गया था।

मांसाहार का आरोप: वायरल वीडियो के आधार पर स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि पार्टी में चिकन और अन्य मांसाहारी व्यंजन परोसे गए थे।

गंगा में गंदगी: सबसे गंभीर आरोप यह है कि खाने के बाद चिकन की हड्डियों और जूठन को सीधे गंगा नदी में फेंक दिया गया, जिसे काशी की मर्यादा के खिलाफ माना जा रहा है।

2. संतों और हिंदू संगठनों का रुख

मर्यादा का उल्लंघन: काशी के संतों का कहना है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि हिंदुओं की आस्था का केंद्र हैं। वहां मांसाहार करना और जूठन फेंकना करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला है।

कार्रवाई की मांग: विश्व हिंदू परिषद (VHP) और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों ने पुलिस प्रशासन से आयोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका तर्क है कि यह सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है।

3. पुलिस और प्रशासन की जांच

वीडियो की सत्यता: वाराणसी पुलिस इस वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह वीडियो हाल का है या पुराना, और नाव पर मौजूद लोग कौन थे।

गाइडलाइंस का उल्लंघन: गंगा में नावों पर खान-पान को लेकर प्रशासन की सख्त गाइडलाइंस हैं। यदि इसमें नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नाविक और आयोजक दोनों पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

4. सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

इंटरनेट पर यह मामला काफी चर्चा में है। कई यूजर्स इसे ‘टारगेटेड’ कृत्य बता रहे हैं, जबकि कुछ अन्य इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आपसी भाईचारे का हिस्सा मान रहे हैं। हालांकि, धार्मिक नगरी वाराणसी की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन अलर्ट पर है।

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