‘कब तक बूढ़े लोग फैसला करेंगे…’ अन्ना हजारे पर कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके का विवादित बयान, छिड़ा सोशल मीडिया पर युद्ध “How long will old people make the decisions…” Abhijit Deepke of the ‘Cockroach Janata Party’ makes a controversial statement about Anna Hazare; a social media war erupts.

राजनीतिक डेस्क: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक मामले को लेकर देश में सियासी पारा पहले से ही गरमाया हुआ है, लेकिन इसी बीच आंदोलन की अगुवाई कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे दिया है, जिसने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी बहस छिड़ गई है।

“60-70 के लोग रिटायर होकर आश्रम में बैठें” – अभिजीत दीपके

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिनों से प्रदर्शन कर रहे अभिजीत दीपके अपने गृह जिले छत्रपति संभाजीनगर में छात्रों के एक प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या वे इस आंदोलन को लेकर अन्ना हजारे से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने दो टूक मना कर दिया।

दीपके ने तल्ख लहजे में कहा, “बिल्कुल नहीं! मुझे लगता है कि युवाओं को अब चीजें अपने हाथ में लेनी चाहिए। जो लोग 60-70 के हो गए हैं, उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए—चाहें राजनीति हो या एक्टिविज्म। वे आश्रम में जाकर बैठें। यह हमारे भविष्य का सवाल है, छात्रों का भविष्य है, हमें फैसला करने दो। आखिर कब तक बूढ़े लोग हमारे फैसले करते रहेंगे?”

बयान पर भड़के लोग, सोनम वांगचुक को लेकर दीपके को घेरा

अभिजीत दीपके के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है। यूजर्स उनके इस ‘एज शेमिंग’ वाले बयान पर उन्हें पाखंडी बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक तरफ दीपके बुजुर्गों और अन्ना हजारे को किनारे करने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अपने आंदोलन के लिए 59-60 साल के सोनम वांगचुक को आगे कर भूख हड़ताल करवा रहे हैं। लोगों ने सवाल उठाया, “अगर बूढ़ों से प्रेरणा नहीं लेनी तो खुद अनशन पर क्यों नहीं बैठते, वांगचुक को आगे क्यों धकेल रखा है?”

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन, तेजी से गिर रहा वजन

आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी का दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन मंगलवार (7 जुलाई 2026) को 18वें दिन में पहुंच चुका है। आंदोलन के समर्थन में दिग्गज पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पिछले 10 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी सेहत बिगड़ रही है और अब तक उनका वजन 6.9 किलोग्राम कम हो चुका है, जिससे समर्थकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

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