असम में 15.25 करोड़ का बड़ा फर्जीवाड़ा: पोर्श और मर्सिडीज कारें जब्त, 6 महीने में पैसा दोगुना करने का देते थे लालच
देश में ठगी और वित्तीय घोटालों के खिलाफ जांच एजेंसियों का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने असम में एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जबरदस्त कार्रवाई की है। उत्पाद-आधारित मल्टी-लेवल मार्केटिंग इकाई ‘गोमिलियंस एलएलपी’ (Gomillions LLP) से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी ने कुल 15.25 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है। इस कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने आरोपियों की पोर्श (Porsche) और मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz) जैसी बेहद महंगी लग्जरी कारों के साथ-साथ भारी बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और स्टॉक ट्रेडिंग खातों को भी अपने कब्जे में ले लिया है। असम में चलाई जा रही इस अनियंत्रित जमा योजना और धोखाधड़ी के इस बड़े खुलासे से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
6 महीने में पैसा दोगुना करने का झांसा देकर की गई ठगी
जांच एजेंसियों और अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे घोटाले के मुख्य आरोपी और कंपनी के प्रमोटर ऋषिराज गोगोई, जॉय मोदक और उनके सहयोगियों ने मिलकर ‘ट्रेडबुल’ नाम से एक मार्केटिंग एजेंसी का संचालन किया था। इन शातिर आरोपियों ने भोले-भाले निवेशकों को रोजाना 0.85 प्रतिशत का भारी-भरकम और निश्चित रिटर्न देने का लालच दिया। जनता को यह यकीन दिलाया गया कि उनका पैसा महज छह महीने में दोगुना हो जाएगा। इस आकर्षक और झूठे वादे के जाल में फंसकर हजारों लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई इनमें निवेश कर दी। हैरानी की बात यह है कि जनता से करोड़ों रुपये की यह अवैध राशि जुटाने के लिए इस कंपनी के पास किसी भी नियामक (Regulatory Body) का कोई पंजीकरण या कानूनी प्राधिकरण नहीं था। इस घोटाले की गहराई से जांच करने पर कंपनी के सर्वर से 25,410 से अधिक निवेशकों का डाटा मिला है, जिससे पता चलता है कि कंपनी पर निवेशकों की कुल देनदारी लगभग 34.93 करोड़ रुपये की है।
शेल कंपनियों के जरिए पैसों की हेराफेरी और लग्जरी में निवेश
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि गोमिलियंस एलएलपी के मुख्य बैंक खातों में कुल 63.41 करोड़ रुपये जमा किए गए थे। आम जनता की गाढ़ी कमाई से हासिल की गई इस अवैध आय (Proceeds of Crime) को छिपाने के लिए आरोपियों ने कई फर्जी और शेल कंपनियों का सहारा लिया। इस रकम को राइटवे इन्फोकॉम प्राइवेट लिमिटेड, केयरली सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और लोटस कॉरपोरेशन जैसी जुड़ी हुई संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर कर घुमाया गया। इसके बाद इस काले धन को मुख्य प्रमोटरों और उनके परिजनों के निजी बैंक खातों में भेज दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि ठगी के इस पैसों से आरोपी ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे थे और उन्होंने इसे महंगी लग्जरी गाड़ियों, शेयर बाजार के ट्रेडिंग खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश किया था। फिलहाल ईडी इस पूरे नेटवर्क के अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है ताकि धोखाधड़ी में शामिल बाकी चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।
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