‘‘ह्यूमर मेरे स्‍वभाव का दूसरा रूप है’’ -अमितोष नागपाल उर्फ रॉकी  

‘‘ह्यूमर मेरे स्‍वभाव का दूसरा रूप है’’ यह कहना है सोनी सब के ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ के अमितोष नागपाल उर्फ रॉकी

 

  • ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ का कॉन्‍सेप्‍ट क्‍या है?

इस शो में एक तरफ बैंड बाजा है और दूसरी तरफ बंद दरवाजा है। एक तरफ शादी को लेकर तैयारियां चल रही हैं और वहीं दूसरी तरफ भूत शादी को रोकने की कोशिश कर रहा है। इसके पीछे के कारणों को जानने के लिये आपको इस शो को देखना होगा। इस शो में और भी एंगल हैं। मैचमेकर स्‍नेहा शादी करवाने की पूरी कोशिश कर रही है, जबकि भूत यह कोशिश कर रहा है कि ऐसा ना हो पाये।

 

  • अपने किरदार रॉकी के बारे में कुछ बतायें?

रॉकी बहुत ही श‍र्मीला लड़का है, वह किसी लड़की से बात करने में घबरा जाता है और मैचमेकर्स उसे शादी के लिये लड़कियों से मिलवाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, उन लड़कियों की कुछ अलग तरह की कहानियां और मजेदार पृष्‍ठभूमि होती है। आखिरकार रॉकी उन स्थितियों से सामंजस्‍य बिठाना शुरू कर देता है और लड़कियों से बात करना सीख जाता है, लेकिन भूत कभी भी चीजों को बर्बाद करने और दखलअंदाजी करने का कोई मौका नहीं छोड़ता।

 

  • आप वास्‍तविक जीवन में भी एक गीतकार हैं और इस शो में आप एक सिंगर हैं। तो परदे पर एक सिंगर की भूमिका निभाने में उससे कितनी मदद मिली?

मैं थियेटर की दुनिया से आया हूं। मैं लिखता हूं, कंपोज करता हूं, अभिनय करता हूं और काफी सारी दूसरी चीजें करता हूं। मैंने ‘ओय लकी! लकी ओय! और कई सारे विज्ञापनों के लिये भी लिखा है। बाकी भूमिकाएं जिस तरह मेरे पास आती हैं उसी तरह यह भूमिका भी आयी। यह मजेदार है और यह मानते हुए कि मैंने भी यह शो लिखा है मैं अपने हुनर का कई जगहों पर इस्‍तेमाल कर सकता हूं। जिस तरह  इसके फायदे हैं उसी तरह इसकी मुश्किलें भी हैं क्‍योंकि आपको शुरुआत में ही अपनी भूमिका के बारे में काफी कुछ पता होता है और आपको खुद के लिये हैरान कर देने वाली चीज तैयार करनी पड़ती है।

 

  • आप इस शो में पुरुष के साथ-साथ महिला की आवाज में भी गा रहे हैं। क्‍या इसके लिये आपने कोई खास ट्रेनिंग ली है?

यह सिर्फ मेरा किरदार है, सच्‍चाई यह है कि उस आवाज को डब किया गया है। मैं महिला की आवाज में नहीं गा रहा हूं।

 

  • पहले भी टेलीविजन पर हॉरर कॉमेडी शो आ चुके हैं। ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ उन सबसे किस तरह अलग है?

यह दावा करना मुश्किल है कि आपका शो अलग है। हर कोई यही कह रहा है कि यह अलग है लेकिन यह नहीं जानता कि कितना अलग है, क्‍योंकि मैं बाकी शोज के बारे में बहुत नहीं जानता हूं। हालांकि, हमारे शो के बारे में एक चीज जो अलग है वह है हमारा काम। मुझे नहीं पता कि बाकी शोज किस तरह करते हैं लेकिन जो मैं सुना है उसके हिसाब से उनके पास आखिरी समय तक स्क्रिप्‍ट नहीं होती है और उनके पास सही शेड्यूल नहीं होता है। वहीं हमारे शो में, हमने पहले से ही सारे स्क्रिप्‍ट्स लिख लिये हैं और उसे अंतिम रूप दिया जा चुका है तथा कलाकारों को भी पता है कि उनके किरदार कैसे हैं। कोई भी टीआरपी या कोई चीज इस बात को बदल नहीं पायेगी कि किरदार किस तरह से आगे बढ़ेंगे। हमने फिल्‍म की तरह स्क्रिप्‍ट तैयार कर ली है और हमारी योजना है कि हम उसके अनुसार ही चलेंगे, इससे हमारे काम करने का तरीका अलग हो जाता है।

 

  • एक एक्‍टर होने के अलावा, आप एक डायलॉग राइटर और एक डायरेक्‍टर भी हैं। क्‍या हम आपको ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ में उस भूमिका में भी देख पायेंगे?

इस शो के लिये मैं निर्देशन नहीं कर रहा हूं, लेकिन मेरे बेहद करीबी मित्र मक़बूल खान कर रहे हैं और इस शो को हां कहने की सबसे पहली वजह यही है। मैं उनके साथ इस शो में एक प्रोड्यूसर भी हूं, क्‍योंकि हम दोनों काफी समय से एक साथ काम करना चाहते थे। मक़बूल की वजह से ही मैंने लिखना शुरू किया था, क्‍योंकि उन्‍होंने मुझे सलाह दी थी कि मुझे फिल्‍मों के लिये लिखना चाहिये। यहां टीवी के लिये कुछ लिखने का निर्णय थोड़ा मुश्किल था, क्‍योंकि मेरे पास कुछ फिल्‍में भी थीं लेकिन मैं मक़बूल के साथ काम करना चाहता था और इसलिये इस शो को लेने का फैसला किया।

 

  • इस शो से आपकी क्‍या उम्‍मीद हैं? दर्शकों को ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ में क्‍या पसंद आने वाला है?

मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि जब आप उस पर काम कर रहे होते हैं तो आपको महसूस होता है कि वह संदेश दर्शकों तक पहुंच जायेगा। आधे समय तक लोग यही सोचते रहते हैं कि कुछ तो गड़बड़ है, लेकिन इस शो को लेकर मुझे ऐसा महसूस नहीं हो रहा है। मुझे ऐसा लगता है कि हमने इस शो को बड़े ही प्‍यार से लिखा है, कलाकारों को उसे सुनकर मजा आया, हमें इसमें काम करते हुए मजा आ रहा है और यह चैनल हमारे प्रति बेहद विनम्र है। मैं बस इतना चाहता हूं कि हमारी कहानी हमारे दर्शकों तक पहुंचे, ताकि वे आये और इस शो को देखें।

 

  • आमतौर पर यह माना जाता है कि लोगों को हंसाना मुश्किकल होता है। इस बारे में आपका क्‍या सोचना है और बतौर एक एक्‍टर, राइटर और डायरेक्‍टर आप इससे कैसे निपटते हैं?

इसी तरह मैं अपनी जिंदगी जीता हूं! यदि मैं परेशानियों से घिरा हूं, मैं हंसना शुरू कर देता हूं। ह्यूमर मेरे स्‍वभाव का दूसरा रूप है और यह चीज करना मुझे पसंद है। यदि किसी दिन मैं किसी को हंसा दूं तो बड़ा ही अच्‍छा महसूस होता है। मेरे दोस्‍तों के अनुसार, मैं चीजों को मजेदार तरीके से पेश करने में अच्‍छा हूं और उम्‍मीद करता हूं कि ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ के साथ भी यह चीज दर्शकों तक पहुंचेगी।

 

  • क्‍या आप भूतों/आत्‍माओं पर भरोसा करते हैं या आपका उनसे कभी सामना हुआ है?

मैं भूतों पर भरोसा नहीं करता हूं लेकिन बचपन में भूतों से बहुत डरा करता था। अब ऐसा कोई आमना-सामना नहीं हुआ है लेकिन मेरे जीवन में कुछ ऐसी चीजें हुईं जिन्‍होंने मुझे असमंजस में डाल दिया। उदाहरण के लिये, मुझे यह पता चलता है कि कुछ ऐसी चीज होने वाली है या मैं किसी से मिलने जा रहा हूं और वह कई बार डरावना हो जाता है।

 

  • ‘बैंड बाजा बंद दरवाज़ा’ में शूटिंग का अब तक अनुभव कैसा रहा है?

मैं इसका पूरी तरह से मजा ले रहा हूं। मुकेश तिवारी,अमरदीप झा और नीलू कोहली मेरे सीनियर्स हैं और बेहतरीन परफॉर्मर्स हैं। साथ ही हमारे बाकी कलाकार काफी प्रतिभाशाली और मेहनती हैं। सारी चीजें सचमुच काफी व्‍यवस्थित हैं और सबको एक-दूसरे के साथ काम करने में मजा आ रहा है।

 

  • क्‍या आप सोनी सब देखते हैं ?आपका कोई पसंदीदा शो?

यूं तो मैं बहुत टेलीविजन नहीं देखता हूं लेकिन कॉमेडी के कारण सोनी सब देखा है, जो मुझे पसंद है। मेरे पसंदीदा शोज़ रहे हैं ‘एफआईआर’ और ‘ऑफिस ऑफिस’, लेकिन फिलहाल मुझे ‘तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा‘ देखना अच्‍छा लग रहा है।

 

  • कई लोग भूतों से आसानी से डर जाते हैं या घबरा जाते हैं। उन्‍हें कुछ कहना चाहेंगे?

वाकई मेरे पास उन्‍हें कहने के लिये कुछ भी नहीं है। डरना बहुत ही स्‍वाभाविक सी चीज है।

 

  • क्‍या आपके किरदार बीबीबीडी और आप वास्‍तविक जीवन में जैसे हैं उनमें कोई समानता है?

मेरे साथ ऐसा है कि किसी से कहा कि ‘अमितोष, अपनी तरह बने रहो’’ तब मैंने कहा कि ‘कौन-सा वाला?’’मेरे लिये जीवन ऐसा ही रहा है क्‍योंकि जब मैं 5-6 साल का था तब से ही थियेटर कर रहा हूं। इसलिये, मैं जिस किरदार को गढ़ता हूं और खुद में फर्क कर पाना मेरे लिये मुश्किल होता है। दरअसल, आप जो लिखते हैं कहीं ना कहीं आपके व्‍यक्तिगत जीवन का विस्‍तार होता है, इस शो में रॉकी की तरह ही मैं कहीं ना कहीं लड़कियों से थोड़ा झिझकता हूं।

 

 

 

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