Sahil Lochab News: शरीर में 200 छर्रे, 99% रोशनी गंवाई; जानिए कौन हैं साहिल लोचब जिनके लिए थाने में धरने पर बैठे राहुल गांधी
हरियाणा में किसान आंदोलन और प्रदर्शनों के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए साहिल लोचब का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा साहिल और उनके परिवार के समर्थन में पुलिस थाने पहुंचकर धरने पर बैठने के बाद इस पूरे घटनाक्रम ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मोड़ ले लिया है। साहिल लोचब उस दर्द और संघर्ष का चेहरा बन चुके हैं, जिसकी गूंज अब संसद से लेकर सड़कों तक सुनाई दे रही है।
कौन हैं साहिल लोचब?
साहिल लोचब हरियाणा के रोहतक-जींद क्षेत्र के एक सामान्य किसान परिवार से आने वाले युवा हैं। वे किसान आंदोलन और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहे प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।
फरवरी-मार्च 2024 के दौरान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच हुए टकराव के दौरान साहिल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आंदोलन स्थल पर सुरक्षा बलों द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चलाए गए पैलेट गन (छर्रे) और रबर बुलेट की सीधी चपेट में साहिल आ गए थे।
शरीर में 200 से अधिक छर्रे और आंख की रोशनी पर गहरा आघात
अस्पताल में जांच और प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने पाया कि साहिल के चेहरे, सीने, गर्दन और सिर के हिस्से में 200 से अधिक छर्रे (pellets) धंसे हुए थे। सबसे गहरा असर उनकी आंखों पर पड़ा, जहां छर्रों के कारण उनकी एक आंख की लगभग 99% रोशनी चली गई और दूसरी आंख पर भी गंभीर असर पड़ा।
लंबे समय तक पीजीआईएमएस (PGIMS) रोहतक और बाद में दिल्ली के उच्च चिकित्सा संस्थानों में साहिल का इलाज चला। कई ऑपरेशनों के बावजूद शरीर के बेहद संवेदनशील और नसों के करीब होने के कारण सभी छर्रों को पूरी तरह से बाहर निकालना संभव नहीं हो सका। साहिल आज भी शारीरिक असहनीय दर्द और आंशिक दृष्टिहीनता के साथ जीवन जीने को मजबूर हैं।
राहुल गांधी के थाने में धरने पर बैठने की पूरी वजह
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़ित परिवार और स्थानीय किसान नेताओं ने पुलिस और प्रशासन पर मामले में ढिलाई बरतने, उचित एफआईआर दर्ज न करने और प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग करने वाले दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
पीड़ित साहिल लोचब से मुलाकात करने पहुंचे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रशासन के इस रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया। परिवार को न्याय दिलाने, दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और घायल साहिल को उचित मुआवजा व जीवनयापन सहायता दिए जाने की मांग को लेकर राहुल गांधी कांग्रेस नेताओं के साथ स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे और जमीन पर बैठकर धरने पर शामिल हो गए।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उठा सवाल
राहुल गांधी के इस कदम के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं पर इस स्तर का घातक बल प्रयोग क्यों किया गया। मानवाधिकार संगठनों ने भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए हैं।
दूसरी ओर, प्रशासनिक और पुलिस सूत्रों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बैरिकेड्स तोड़ने से रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत सीमित बल प्रयोग किया गया था और पुलिस किसी भी तरह की कानूनी प्रक्रिया में पक्षपात नहीं कर रही है।
न्याय की उम्मीद में साहिल का परिवार
साहिल लोचब के परिवार का कहना है कि उनका बेटा कोई अपराधी नहीं बल्कि अपने हक की आवाज उठाने गया एक नौजवान था। परिवार की मांग है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि साहिल के भविष्य के लिए स्थायी आर्थिक सुरक्षा, बेहतर मेडिकल सहायता और दोषियों पर जवाबदेही तय की जाए।
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