न्यूज़ डेस्क : आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया। कैग की रिपोर्ट देखकर आपको रेलवे की खस्ता माली हालत का अंदाजा लगाना आसान हो जाएगा। संसद में सोमवार को पेश की गई कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि रेलवे 10 वर्ष के अपने सबसे बुरे समय से गुजर रही है।
हालत यह है कि 100 रुपये की कमाई करने के लिए उसे 98.44 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कैग रिपोर्ट में रेलवे के परिचालन अनुपात की वास्तविक स्थिति दिखाई है। 2015—16 में परिचालन अनुपात 90.49 फीसदी था, 2016—17 में बढ़कर यह 96.5 प्रतिशत हो गया। मगर 2017—18 में यह 10 साल के उच्च स्तर पर 98.44 रुपये पहुंच गया।
साल दर साल बढ़ता परिचालन अनुपात
| वर्ष | अनुपात |
| 2008-09 | 90.48 |
| 2009-10 | 95.28 |
| 2010-11 | 94.59 |
| 2011-12 | 94.85 |
| 2012-13 | 90.19 |
| 2013-14 | 93.60 |
| 2014-15 | 91.25 |
| 2015-16 | 90.49 |
| 2016-17 | 96.50 |
| 2017-18 | 98.44 |
कैग ने सिफारिश की है कि रेलवे को अपनी कमाई बढ़ाने के लिए उपाय करने चाहिए ताकि बजटीय संसाधनों पर निर्भरता कम की जा सके।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017—18 में भारतीय रेल का कुल खर्च 2 लाख 68 हजार 759.62 करोड़ रुपये से बढ़कर 2 लाख 79 हजार 249.50 करोड़ रुपये हो गया। इसमें पूंजीगत व्यय 5.82 प्रतिशत घटा है जबकि राजस्व खर्च में 10.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कर्मचारी लागत, पेंशन भुगतानों और रेल डिब्बे के किराए मद में खर्च कुल व्यय का 71 फीसदी रहा।
माल भाड़े से ज्यादा कमाई
कैग रिपोर्ट के अनुसार रेल का सबसे बड़ा संसाधन माल भाड़ा है। इसके बाद यात्रियों से होने वाली कमाई आती है। अतिरिक्त बजटीय संसाधन और डीजल उपकर की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हो गई जबकि माल भाड़ा, यात्री आय, जीबीएस और अन्य हिस्सेदारी घट गई।
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