“Provoke us, and you won’t be spared”Army Chief General Upendra Dwivedi states: ‘Operation Sindoor’ has determined India’s response. उकसाया तो खैर नहीं आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने तय कर दिया है भारत का जवाब

पुणे के खडकवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में शनिवार को शौर्य और देशभक्ति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। मौका था एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड का, जहां सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। परेड को संबोधित करते हुए आर्मी चीफ ने एक बेहद बड़ा और कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पूरी दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि अगर भारत को किसी ने भी उकसाने की कोशिश की, तो उसका अंजाम क्या होगा। उन्होंने देश के भावी सैन्य अधिकारियों से अपील की कि वे अपने करियर की शुरुआत करते हुए देश के इस उच्च मानक को हमेशा कायम रखें।

आधुनिक युद्ध का बदला स्वरूप, अब वर्दी में नहीं आते खतरे

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने खेत्रपाल परेड ग्राउंड में कैडेटों को संबोधित करते हुए बदलते दौर की सुरक्षा चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “आज के समय में खतरे हमेशा वर्दी में या किसी घोषित मोर्चे पर सामने नहीं आते। ऑपरेशन सिंदूर ने यह पूरी तरह साबित किया है और एक नया बेंचमार्क (मानक) स्थापित किया है कि जब भारत की राष्ट्रीय इच्छाशक्ति को सटीकता और संकल्प के साथ व्यक्त किया जाता है, तो देश हर उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देता है। अब इस गौरवशाली मानक को बनाए रखने की जिम्मेदारी आप सभी युवा कंधों पर है।”

संयुक्तता केवल पढ़ाई नहीं, तीनों सेनाओं का आपसी तालमेल है जीत की गारंटी

सेना प्रमुख ने आधुनिक युद्ध क्षेत्र में थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच आपसी तालमेल और एकजुटता (जॉइंटमैनशिप) के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता उसी एकीकृत दृष्टिकोण (इंटीग्रेटेड अप्रोच) का परिणाम थी, जिसकी मजबूत नींव एनडीए में रखी जाती है। कैडेट्स का हौसला बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि यहां संयुक्तता केवल किताबों में पढ़ने का विषय नहीं है, बल्कि पहले दिन से ही तीनों सेनाओं के सैनिकों के साथ मिलकर जीने और देश के लिए मर-मिटने की एक प्रवृत्ति है।

42 साल बाद अपनी ‘मातृ संस्था’ लौटे सेना प्रमुख, याद कर हुए भावुक

यह ऐतिहासिक अवसर खुद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के लिए भी बेहद भावुक करने वाला था, क्योंकि चार दशक से भी पहले वह खुद इसी अकादमी से पास आउट होकर देश सेवा में निकले थे। आपको बता दें कि जनरल द्विवेदी एनडीए के 65वें कोर्स के छात्र और चार्ली स्क्वाड्रन के जांबाज कैडेट रह चुके हैं। अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा, “42 साल से अधिक समय पहले मैं इसी क्वार्टर डेक से पास आउट हुआ था। आज समीक्षा अधिकारी के रूप में अपनी मातृ संस्था में लौटना मेरे लिए अत्यंत गर्व और सम्मान की बात है। इसी महान संस्थान ने मेरे जीवन के मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा के प्रति मेरी प्रतिबद्धता को आकार दिया है।”

12 मित्र देशों के जांबाज भी हुए पास आउट, परेड की भव्यता ने मोहा मन

इस भव्य पासिंग आउट परेड के दौरान जनरल द्विवेदी ने परेड की समीक्षा की, जहां कुल 355 कैडेटों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ। भारतीय कैडेटों के अलावा, इस पासिंग आउट बैच में भारत के 12 मित्र विदेशी देशों के 24 कैडेट भी शामिल थे, जो यहां से कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने देश की सेवा के लिए रवाना होंगे। परेड की शानदार कदमताल और कैडेटों के चेहरे पर देश सेवा का जज्बा देखने लायक था।

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