Modi government takes major action against oil companies: Windfall tax on export of diesel and aviation fuel increased तेल कंपनियों पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन: डीजल और हवाई ईंधन के निर्यात पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स
वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी भारी उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के संवेदनशील भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत सरकार ने घरेलू तेल बाजार को सुरक्षित रखने के लिए एक अत्यंत बड़ा और कड़ा आर्थिक कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने देश से बाहर भेजे जाने वाले डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स (EAD/विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क) में भारी बढ़ोतरी करने का आधिकारिक एलान कर दिया है। सरकार द्वारा जारी की गई नई अधिसूचना के मुताबिक ये संशोधित और बढ़ी हुई दरें आज यानी 16 जून 2026 से पूरे देश में तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। लाइव हिन्दुस्तान की इस एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड विशेष बिजनेस और इकोनॉमी डेस्क रिपोर्ट में वरिष्ठ संपादक नवीन कुमार के साथ विस्तार से जानिए कि आखिर सरकार को यह अचानक फैसला क्यों लेना पड़ा और इसका घरेलू बाजार की कीमतों पर क्या असर होगा।
जानिए डीजल और हवाई ईंधन (ATF) पर कितना बढ़ा टैक्स, पेट्रोल निर्यातकों को सरकार से मिली बड़ी राहत
वित्त मंत्रालय की ताजा गाइडलाइंस और आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, आगामी 15 दिनों की पाक्षिक समीक्षा अवधि के लिए डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले विमानन टरबाइन ईंधन यानी एटीएफ (ATF) के निर्यात पर इस टैक्स में सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिसे 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर अब सीधे 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले 1.5 रुपये प्रति लीटर के शुल्क में सरकार ने इस बार कोई भी फेरबदल नहीं किया है और इसे पुरानी दरों पर ही बरकरार रखा गया है।
आम जनता के लिए राहत की खबर: घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा कोई भी असर
इस बड़े आर्थिक फैसले के बीच देश के आम उपभोक्ताओं, वाहन चालकों और मिडिल क्लास के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि निर्यात पर बढ़ाए गए इस विंडफॉल टैक्स का देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोलियम उत्पादों से कोई सीधा संबंध नहीं है। सरकार ने घरेलू बाजार (Indian Domestic Market) में बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा मूल उत्पाद शुल्क दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में आम जनता को मिलने वाले रोजमर्रा के पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों (Retail Fuel Prices) पर इस टैक्स बढ़ोतरी का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और दाम पूरी तरह स्थिर रहेंगे।
क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स? तेल कंपनियों के ‘अंधाधुंध’ मुनाफे पर लगाम लगाने की बड़ी क्रोनोलॉजी
अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठ रहा होगा कि आखिर सरकार बार-बार इस विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) को क्यों बढ़ाती या घटाती है? दरअसल, यह विशेष कर उन घरेलू रिफाइनरी और निजी तेल उत्पादक कंपनियों को हतोत्साहित करने के लिए लगाया जाता है, जो वैश्विक संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों का फायदा उठाकर केवल विदेशी बिक्री (एक्सपोर्ट) को प्राथमिकता देने लगती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के दाम बढ़ते हैं, तो ये कंपनियां घरेलू बाजार में तेल बेचने के बजाय विदेशों में तेल बेचकर अनुचित रूप से अत्यधिक और अप्रत्याशित मुनाफा (विंडफॉल गेन्स) कमाने लगती हैं। सरकार इनके इसी अत्यधिक मुनाफे के एक हिस्से पर टैक्स लगाकर इसे नियंत्रित करती है ताकि देश का पैसा बाहर न जाए।
अमेरिका-इरान कूटनीति के बीच देश में पर्याप्त ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करना मुख्य लक्ष्य, मार्च में हुई थी शुरुआत
इस पाक्षिक नीतिगत बदलाव का मुख्य रणनीतिक उद्देश्य पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में लगातार चल रहे गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स व्यवधानों के बीच भारत के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित करना है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक कूटनीति के तहत अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु व आर्थिक समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति जरूर देखी जा रही है, लेकिन यह वार्ता अभी अपने बिल्कुल शुरुआती और नाजुक दौर में है। इसी अनिश्चितता को भांपते हुए भारत सरकार ने एक बेहद जरूरी एहतियाती कदम उठाया है। गौरतलब है कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में मिडल ईस्ट संकट के कारण पैदा हुए व्यवधानों के बाद, सरकार ने पहली बार इसी साल मार्च में डीजल और एटीएफ पर विशेष निर्यात शुल्क लगाया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल इंडेक्स के आधार पर समय-समय पर संशोधित किया जाता रहता है।
Comments are closed.