Major Upheaval in the TMC Following Bengal Election Defeat; Open Demands to Remove Mamata Banerjee from Leadership बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC में महाविस्फोट, ममता बनर्जी को नेतृत्व से हटाने की खुली मांग
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करने के बाद अब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर के हालात बेहद विकट और विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। पार्टी के भीतर सालों से दबा गुस्सा अब खुलकर सड़कों और मीडिया के सामने आने लगा है। ममता बनर्जी के बेहद करीबी और वरिष्ठ नेताओं ने ही अब सीधे अपनी ‘सुप्रीमो’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उन्हें पार्टी नेतृत्व से हटाए जाने की मांग शुरू हो गई है। यह अंदरूनी बगावत ऐसे समय पर सामने आई है, जब टीएमसी पार्षदों से लेकर सांसदों तक के स्तर पर भारी असंतोष और नाराजगी से जूझ रही है। हाल ही में सांसद काकोली घोष दस्तीदार समेत कई कद्दावर नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफे देकर हाईकमान को बड़ा झटका दिया है।
‘जो फेल हो गया उसे बदल देना चाहिए’, ममता के 4 दशक पुराने साथी के तीखे बोल
ममता बनर्जी के सबसे पुराने और करीब 4 दशक पुराने राजनीतिक साथी माने जाने वाले कोलकाता नगर निगम के पार्षद तारक सिंह इस समय बेहद नाराज चल रहे हैं। हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान उन्होंने जो कहा, उसने पूरी पार्टी के भीतर हड़कंप मचा दिया है। तारक सिंह ने बिना किसी डर के सीधे तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की मांग कर डाली है। इसके साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी अपनी तीखी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि, इस खुली बगावत को लेकर फिलहाल टीएमसी नेतृत्व की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इंटरव्यू में ऑन-रिकॉर्ड बोले तारक सिंह— ‘ज्यादा से ज्यादा पार्टी से निकाल देंगे, मुझे फर्क नहीं पड़ता’
एक जाने-माने बंगाली समाचार चैनल ‘एबीपी आनंद’ से बातचीत के दौरान जब तारक सिंह से सीधा सवाल किया गया कि वह पार्टी में क्या बदलाव देखना चाहते हैं, तो उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में जवाब दिया।
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सवाल: आप पार्टी के भीतर क्या बदलना चाहते हैं?
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तारक सिंह: “जो लोग आज नेतृत्व कर रहे हैं, मैं सीधे तौर पर उन्हें ही बदलना चाहता हूं।”
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सवाल: क्या आपका इशारा सीधे ममता बनर्जी की तरफ है?
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तारक सिंह: “हां, बिल्कुल। मैं यह बात पूरी तरह ऑन-रिकॉर्ड कह रहा हूं। मैं किसी से डरता हूं क्या? जो नेतृत्व पूरी तरह फेल हो गया है, जो नेतृत्व संकट के समय अपने जमीन कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा नहीं रह सकता, वो आगे क्या करेगा?”
जब उनसे अभिषेक बनर्जी की भूमिका को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “मुझे उनके (अभिषेक) बारे में व्यक्तिगत रूप से कुछ नहीं कहना है। मुझे इसलिए कुछ नहीं कहना, क्योंकि मैं उस मूल व्यक्ति (ममता बनर्जी) के ही खिलाफ हूं जिसने अभिषेक को राजनीति में लाकर इतना बड़ा बनाया है। ज्यादा से ज्यादा पार्टी मेरे खिलाफ क्या एक्शन ले सकती है? मुझे पार्टी से बाहर निकाल सकती है। तो निकाल दें, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
शांतनु सेन का भी फूटा गुस्सा, राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से दिया इस्तीफा
तारक सिंह की इस खुली बगावत के बीच, टीएमसी के एक और बड़े चेहरे और पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन ने भी गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देकर ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। अपने इस्तीफे में सेन ने पार्टी के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार पर गहरी निराशा व्यक्त की है।
उन्होंने लिखा, “TMC की स्थापना के समय से एक वफादार सिपाही होने के बावजूद, अब पार्टी से जुड़े विवादों और घोटालों का सार्वजनिक रूप से बचाव करना मुझे नैतिक रूप से ठीक नहीं लगता। कई बेहद मुश्किल परिस्थितियों में जब मेरी खुद की अंतरात्मा भी गवाही नहीं दे रही थी, तब भी मैंने टेलीविजन डिबेट्स और मीडिया मंचों पर हमेशा पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा, जिसके लिए मुझे आम जनता की भारी आलोचना और गुस्से का सामना करना पड़ा।”
आरजी कर कांड और नौकरी घोटाले का किया जिक्र— ‘अब अंतरात्मा गवाही नहीं देती’
शांतनु सेन ने अपने त्यागपत्र में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज की दर्दनाक घटना, शिक्षक भर्ती (नौकरी) घोटाले और विभिन्न प्रकार के अनैतिक कार्यों व भ्रष्टाचार के कारण बंगाल की जनता ने अब तृणमूल कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है। ऐसी स्थिति में मेरी अंतरात्मा अब मुझे एक प्रवक्ता के रूप में इन गलत और अनैतिक बातों का टीवी पर बैठकर समर्थन करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव हारने के बाद शुरू हुआ यह अंतर्विरोध आने वाले दिनों में टीएमसी को पूरी तरह बिखराव की कगार पर ले जा सकता है।
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