Major Crisis for the Mamata Government in Bengal: Massive Exodus Rocks the TMC Immediately After Election Defeat Over 100 Councilors Resign बंगाल में ममता सरकार पर महा-संकट: चुनाव हारते ही TMC में मची भयंकर भगदड़, 100 से ज्यादा पार्षदों का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी और ऐतिहासिक हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का असंतोष अब ज्वालामुखी बनकर फट पड़ा है। पार्टी पर इस वक्त अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है क्योंकि सूबे की कई महत्वपूर्ण नगरपालिकाओं में पार्षदों के इस्तीफों की बाढ़ आ गई है। सामूहिक रूप से इस्तीफा देने वाले पार्षदों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच चुका है।

इस बगावत की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बागी पार्षद अब खुलकर पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के बहुचर्चित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की धज्जियां उड़ा रहे हैं। इतना ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें भी बेहद तेज हैं कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद (MP) भी बहुत जल्द ममता बनर्जी का साथ छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थामने की तैयारी में हैं।

खुद अभिषेक बनर्जी के गढ़ में लगी सेंध, ताश के पत्तों की तरह बिखरा बोर्ड

बगावत की यह सबसे तेज आग ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में ही भड़की है। डायमंड हार्बर नगरपालिका में कुल 16 बोर्ड सदस्य हैं, जिनमें से 8 ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

इस राजनीतिक उठापटक के बीच डायमंड हार्बर नगरपालिका के अध्यक्ष प्रणब दास ने मीडिया से बातचीत में अपनी बेबसी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हमने नगरपालिका क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव कोशिश की, लेकिन हमारा कार्यकाल सिर्फ पांच साल का होता है। मैं भले ही अभी चेयरमैन हूं, लेकिन यह बोर्ड कभी भी पूरी तरह टूट सकता है। क्षेत्र के विकास के लिए हर किसी के साथ की जरूरत होती है।”

पुलिस चला रही थी नगरपालिका: अभिषेक बनर्जी के मॉडल पर उठे गंभीर सवाल

टीएमसी से इस्तीफा देने वाले पार्षदों ने अभिषेक बनर्जी के तथाकथित ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की पोल खोलकर रख दी है। पार्षदों का सीधा और गंभीर आरोप है कि इस मॉडल के नाम पर पूरे इलाके में केवल अराजकता और तानाशाही फैलाई जा रही थी। दिलचस्प बात यह है कि अभिषेक बनर्जी अक्सर राष्ट्रीय मंचों पर अपने क्षेत्र के विकास के प्रतीक के रूप में इसी मॉडल की तारीफ करते थकते नहीं थे।

बागी पार्षदों का कहना है कि जब भी वे स्थानीय स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत आलाकमान से करने की कोशिश करते थे, तो पुलिस के जरिए उन्हें प्रताड़ित और परेशान किया जाता था। पार्षदों ने यहां तक कह दिया कि, “नगरपालिका को चेयरमैन नहीं, बल्कि पुलिस अपने इशारों पर चला रही थी।” वार्ड नंबर 7 से इस्तीफा देने वाले पार्षद तमल हल्दर ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन पर पुलिस का जरूरत से ज्यादा और अवैध कब्जा था। पुलिस केवल ऊपर से मिलने वाले तानाशाही आदेशों को लागू कर रही थी। हमने अपनी लीडरशिप को इस बारे में कई बार आगाह किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

भाटपारा से लेकर कांथी तक टीएमसी साफ, जानिए कहां-कितनी बड़ी टूट

पश्चिम बंगाल की कई नगरपालिकाओं से जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वह ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। सूबे में नगरपालिकाओं का गणित कुछ इस तरह बिगड़ चुका है:

  • भाटपारा नगरपालिका: टीएमसी को सबसे बड़ा और घातक झटका यहीं लगा है, जहां कुल 35 पार्षदों में से 30 ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।

  • उत्तर बैरकपुर: कुल 23 वार्डों में से मौजूदा 20 पार्षदों में शामिल चेयरमैन सहित 15 पार्षदों ने पार्टी को बॉय-बॉय कह दिया है।

  • गरुलीया: यहाँ 21 में से 18 पार्षदों ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए पद छोड़ दिया है।

  • हलीशहर: इस नगरपालिका में भी 23 में से 16 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है।

  • कांचरापाड़ा: यहाँ 24 में से 14 टीएमसी पार्षद अपने कदम पीछे खींच चुके हैं।

  • कांथी: शुभेंदु अधिकारी के इस गढ़ में भी 17 में से 12 टीएमसी पार्षदों ने पद से त्यागपत्र दे दिया है।

भंग हो सकती हैं नगरपालिकाएं, प्रशासक राज की तैयारी में सरकार

पश्चिम बंगाल में मचे इस भीषण राजनीतिक घमासान के बीच अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है। राज्य सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल नगरपालिका अधिनियम 1993 के तहत सरकार के पास विशेष अधिकार होते हैं।

अगर किसी भी नगरपालिका में दो-तिहाई से ज्यादा पार्षद सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देते हैं, तो राज्य सरकार के पास उस पूरे बोर्ड को तुरंत प्रभाव से भंग करने की शक्ति होती है। मौजूदा हालातों को देखते हुए माना जा रहा है कि इन सभी नगरपालिकाओं में दोबारा चुनाव होने तक कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत जल्द सरकारी प्रशासकों (Administrators) की नियुक्ति की जा सकती है।

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