Delhi faces a massive water crisis: 20% of the population suffers from thirst amid record-breaking June heat. दिल्ली में जल संकट का महाविस्फोट: जून की रिकॉर्ड तोड़ तपिश के बीच प्यास से तड़प उठी 20 फीसदी जनता
देश की राजधानी दिल्ली इस समय दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ जहां जून की शुरुआत होते ही आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की करीब 20 प्रतिशत आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने को मजबूर हो गई है। दिल्ली के कई इलाकों में जल संकट (Delhi Water Crisis) इस कदर गहरा गया है कि सुबह होते ही पानी के टैंकरों के पीछे सैकड़ों लोगों की लंबी कतारें और उनके बीच मचने वाली अफ़रातफ़री अब आम बात हो चुकी है। तापमान के नए रिकॉर्ड बनाने के साथ ही पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिसने पूरी दिल्ली को बेहाल कर दिया है।
वीआईपी से लेकर स्लम तक पानी की किल्लत से मची चीख-पुकार
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के तमाम दावों के बावजूद पानी का यह गंभीर संकट केवल जेजे कॉलोनियों या झुग्गी-झोपड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इसने दिल्ली के कई पॉश और वीआईपी इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। गीता कॉलोनी, ओखला, छतरपुर, संगम विहार, देवली और महरौली जैसे डार्क जोन वाले इलाकों के साथ-साथ अब सेंट्रल और साउथ दिल्ली के कई रिहायशी इलाकों में भी हाहाकार मचा हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नल में पानी आने का कोई तय समय नहीं है और जो पानी आ भी रहा है, वह बेहद कम दबाव के साथ और गंदा आ रहा है, जिससे लोग पीने के पानी के लिए पूरी तरह प्राइवेट टैंकर माफियाओं और बोतलबंद पानी पर निर्भर हो गए हैं।
यमुना का घटता जलस्तर और पड़ोसियों से तकरार ने बिगाड़ा खेल
इस भयंकर जल संकट के पीछे का मुख्य तकनीकी कारण यमुना नदी के जलस्तर में आई भारी गिरावट को माना जा रहा है। वजीराबाद और चंद्रावल वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि पीछे से कच्चे पानी की सप्लाई बेहद कम हो गई है। दिल्ली सरकार का आरोप है कि पड़ोसी राज्यों से उनके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है, जबकि इस भीषण गर्मी में पानी की मांग अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। इस राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान के बीच दिल्ली की आम जनता पिस रही है, जिसे इस भीषण लू (Heatwave) और जून की तपिश में नहाने-धोने तो दूर, प्यास बुझाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।
टैंकरों के भरोसे कट रही जिंदगी और महंगे दामों की दोहरी मार
पानी की इस भारी किल्लत ने टैंकर माफियाओं की चांदी कर दी है। सरकारी टैंकरों की संख्या कम होने के कारण निजी टैंकर संचालक मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के लोगों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। कई इलाकों में तो पानी के लिए लोगों के बीच हिंसक झड़पें भी देखने को मिल रही हैं। मौसम विभाग (IMD) की मानें तो आने वाले कुछ दिनों तक गर्मी से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, जिसका सीधा मतलब है कि अगर प्रशासन ने पानी के वितरण और लीकेज की समस्या को तुरंत दुरुस्त नहीं किया, तो दिल्ली में यह जल संकट आने वाले दिनों में और भी ज्यादा खौफनाक रूप अख्तियार कर सकता है।
Comments are closed.