भारतीय राजनीतिक गलियारों में विरोध प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था को लेकर जुबानी जंग एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर सीधा और बेहद आक्रामक हमला बोला है। एक तीखी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से सवाल किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के 280 से अधिक अफसरों को बेरहमी से क्यों पीटा गया? उन्होंने दो टूक शब्दों में पूछा कि क्या कांग्रेस पार्टी और उसके नेता देश की राजधानी में अराजकता फैलाना चाहते हैं और जंतर-मंतर जैसी संवेदनशील जगहों पर उपद्रव को संरक्षण दे रहे हैं? आइए एक स्वतंत्र ग्राउंड रिपोर्टर की नजर से समझते हैं कि इस सियासी घमासान के पीछे की असली और पूरी कहानी क्या है।
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न राजनीतिक दलों और समूहों द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक पूरी तरह बेकाबू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने तय सीमाओं और पुलिस बैरिकेड्स को तोड़कर हिंसा का रास्ता अपना लिया। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने जब भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, तो उग्र प्रदर्शनकारियों ने उन पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से हमला कर दिया।
इस सनसनीखेज और कायराना हमले में दिल्ली पुलिस के लगभग 280 अधिकारी और जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं और उनके सिर तथा हड्डियों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात खाकी वर्दी वालों पर इस तरह का जानलेवा हमला देश की राजधानी की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर गया है।
इस खौफनाक घटना के बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी और विशेष तौर पर राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। स्मृति ईरानी ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि एक तरफ कांग्रेस पार्टी संविधान बचाने की बात करती है, तो दूसरी तरफ उनके इशारे पर और उनकी छत्रछाया में पलने वाले उपद्रवी देश के कानून-व्यवस्था के रखवाले यानी पुलिसकर्मियों पर सरेआम कातिलाना हमले करते हैं।
स्मृति ईरानी ने सीधे शब्दों में राहुल गांधी से जवाब मांगते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हिंसा की आग भड़काने वाले कौन लोग थे? उन्होंने तीखा सवाल किया कि क्या राहुल गांधी और उनकी पार्टी देश के पुलिस बलों का मनोबल गिराकर अराजकता का माहौल पैदा करना चाहती है ताकि राजनीतिक रोटियां सेकी जा सकें? उन्होंने जोर देकर कहा कि खाकी वर्दी पर हाथ उठाने वालों और उन्हें संरक्षण देने वाले नेताओं को देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
स्मृति ईरानी के इस बयान के बाद देश भर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पुलिस संगठनों और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने वाले समूहों ने भी इस हिंसक घटना की कड़ी निंदा की है। जानकारों का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने, प्रदर्शन करने और अपनी मांगें मनवाने का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन विरोध प्रदर्शन की आड़ में हिंसा का सहारा लेना और कानून के रखवालों की जान लेना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने दिल्ली की सियासत में एक बार फिर पुलिस प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच के टकराव को उजागर कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक सियासी पारा और अधिक चढ़ने की पूरी संभावना है।
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