हम लोग आतंकवादी नहीं, देश के सांसद हैं’, संजय सिंह का दिल्ली पुलिस पर बर्बरता का गंभीर आरोप; विशेषाधिकार समिति को लिखा पत्र
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए संसद की विशेषाधिकार समिति (Committee of Privileges) को औपचारिक शिकायत पत्र भेजा है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दौरान सांसदों, वकीलों, पत्रकारों और आम नागरिकों के साथ अमानवीय व्यवहार और मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है।
संजय सिंह ने कहा कि सांसद कोई गुंडे, माफिया या आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि वे देश की सर्वोच्च पंचायत यानी संसद के निर्वाचित सदस्य हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकतंत्र में वोट चोरी, तानाशाही या किसी भी अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है। यह अधिकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से मिला है, जिसे पुलिसिया ताकत के दम पर छीना नहीं जा सकता।
‘तीन बार घसीटा गया, गर्दन खींची गई’: लगाए गंभीर शारीरिक दुर्व्यवहार के आरोप
संजय सिंह ने अपने पत्र और सार्वजनिक बयान में दिल्ली पुलिस पर सुनियोजित तरीके से बल प्रयोग करने का आरोप लगाया:
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तारीखों का ब्योरा: उन्होंने दावा किया कि अक्टूबर महीने में 2, 10 और 12 तारीख को आयोजित विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनके साथ बार-बार अमर्यादित व्यवहार किया गया।
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शारीरिक बदसलूकी: आप सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें तीन बार जमीन पर घसीटा, उनकी गर्दन खींची और उनके साथ मारपीट की।
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नागरिकों और पत्रकारों पर कार्रवाई: उन्होंने कहा कि केवल जन प्रतिनिधियों के साथ ही नहीं, बल्कि कवरेज कर रहे पत्रकारों, कानूनी मदद के लिए मौजूद वकीलों और यहां तक कि छोटी बच्चियों तक के साथ पुलिस ने धक्का-मुक्की और बल प्रयोग किया।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई की मांग
संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठाए:
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उन्होंने बताया कि इन घटनाओं के दौरान उन्होंने व्यक्तिगत रूप से दिल्ली पुलिस कमिश्नर से संपर्क साधने की कोशिश की, फोन किए और संदेश भेजे, लेकिन उनकी तरफ से न तो कोई फोन उठाया गया और न ही कोई जवाब दिया गया।
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सांसद ने आरोप लगाया कि राजधानी में पुलिस को विपक्षी दलों की आवाज दबाने और मनमानी करने की खुली छूट दे दी गई है।
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इसी आधार पर उन्होंने विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ संसदीय विशेषाधिकार के हनन का मामला चलाने और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत में भी साक्ष्य पेश कर कानूनी शिकायत दर्ज कराएंगे।
विशेषाधिकार समिति की भूमिका और आगे की प्रक्रिया
संसद के नियमों के तहत, जब किसी सांसद के साथ कर्तव्य निर्वहन या उनके संवैधानिक अधिकारों के संदर्भ में लोक सेवकों द्वारा दुर्व्यवहार या विशेषाधिकार हनन की शिकायत की जाती है, तो विशेषाधिकार समिति उस मामले की जांच करती है:
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नोटिस और गवाही: समिति संबंधित पुलिस अधिकारियों और पुलिस कमिश्नर को समन भेजकर उनका पक्ष जान सकती है।
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सबूतों की जांच: घटना के वीडियो फुटेज और मेडिकल साक्ष्यों का परीक्षण किया जाता है।
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संसद को सिफारिश: जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट और दंडात्मक या प्रशासनिक सिफारिशें सदन के पटल पर रखती है।
आप सांसद के इस पत्र के बाद दिल्ली के सियासी गलियारों में पुलिस बनाम विपक्ष का टकराव एक बार फिर गहरा गया है।
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