धंधा 70% गिरा, कारोबारियों को 2 हजार करोड़ का भारी झटका

त्योहारी सीजन की दहलीज पर खड़े देश की राजधानी दिल्ली के खुदरा और थोक व्यापारियों को शनिवार को उस समय बहुत बड़ा झटका लगा, जब दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस (CP) समेत मध्य दिल्ली के प्रमुख बाजारों के शटर पूरे दिन गिरे रहे। चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) और संयुक्त मंचों द्वारा जंतर-मंतर पर बुलाए गए व्यापक विरोध प्रदर्शन (‘जंतर-मंतर 2.0’) के कारण पूरी नई दिल्ली छावनी में तब्दील हो गई। सुरक्षा चिंताओं, कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास बंद होने, भारी बैरिकेडिंग और संभावित उपद्रव के डर से व्यापारियों ने अपनी दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रखने का फैसला किया। न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) और चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, वीकेंड के इस एकलौते दिन कारोबार ठप होने से दिल्ली के व्यापारियों को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का सीधा व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा है।

आमतौर पर शनिवार और रविवार के दिन कनॉट प्लेस, खान मार्केट, जनपथ और पालिका बाजार जैसे इलाकों में दिल्ली-एनसीआर के अलावा पड़ोसी राज्यों से लाखों लोग खरीदारी और खान-पान के लिए उमड़ते हैं। नवरात्रि और आगामी दिवाली के त्योहारों के चलते व्यापारियों ने दुकानों में नए स्टॉक भर रखे थे और बिक्री की भारी उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि, सुबह से ही प्रदर्शनकारियों के जमावड़े, जगह-जगह पुलिस की नाकेबंदी और धारा 144 लागू होने के चलते खरीदार घरों से बाहर नहीं निकल सके। व्यापारियों का कहना है कि जहां सामान्य दिनों में इस समय बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वहीं आज सड़कों और गलियारों में केवल पुलिस के जवान, अर्धसैनिक बल और सन्नाटा ही पसरा दिखाई दिया।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल के अनुसार, जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास के तनाव का असर केवल कनॉट प्लेस तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा पूरी दिल्ली के व्यापार तंत्र तक फैल गया। चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार और करोल बाग जैसे एशिया के सबसे बड़े थोक बाजारों में भी ग्राहकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित रही। सीटीआई के आंकड़ों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों और यातायात प्रतिबंधों के कारण दिल्ली का कुल व्यापार सामान्य स्तर से घटकर महज 30 प्रतिशत पर आ गया, यानी कारोबार में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस व्यवधान से दिल्ली के करीब 15 लाख छोटे-बड़े व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं और दैनिक वेतनभोगियों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

व्यापारियों के नुकसान की एक प्रमुख वजह दिल्ली मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ठप होना रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस की सलाह पर डीएमआरसी ने राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन और जनपथ समेत कई अहम मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद कर दिए थे। इसके अतिरिक्त मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के अस्थायी निलंबन के कारण डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बिलिंग और कैब सेवाएं भी बुरी तरह लड़खड़ा गईं। बाहर के शहरों (जैसे नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद) से दिल्ली आकर थोक खरीदारी करने वाले व्यापारी रास्ते में ही जाम और पाबंदियों के कारण लौट गए, जिससे दुकानों में रखा सामान धरा का धरा रह गया।

कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में स्थित सैकड़ों रेस्तरां, बार, कैफे, सिनेमा हॉल और सैलून को भी इस बंद की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। वीकेंड पर इन जगहों पर सामान्य दिनों की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक फुटफॉल होता है, लेकिन उपद्रव और सुरक्षा के खतरे को देखते हुए ग्राहकों ने पहले से की गई टेबल और मूवी टिकट बुकिंग्स सामूहिक रूप से कैंसिल कर दीं। खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि खान मार्केट जैसे प्रीमियम बाजार में एक दिन दुकान बंद रहने से प्रति कारोबारी लाखों का नुकसान होता है, और रेस्तरां में रखी खराब होने वाली खाद्य सामग्रियां बेकार हो जाने से क्षति दोगुनी हो जाती है।

न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (NDTA) और अन्य व्यापारिक संगठनों ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। व्यापारी प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और संगठन को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार आम नागरिकों की सुरक्षा, आवश्यक सेवाओं को ठप करने और व्यापारियों को अरबों रुपये के नुकसान की कीमत पर इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। व्यापारियों ने केंद्र सरकार और उपराज्यपाल से मांग की है कि जंतर-मंतर या कनॉट प्लेस जैसे व्यस्ततम वाणिज्यिक और रिहायशी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के बड़े धरने-प्रदर्शनों पर स्थायी रोक लगाई जाए और विरोध स्थलों को शहर से दूर किसी खुले मैदान या तय पेरिफेरल इलाकों में शिफ्ट किया जाए, ताकि त्योहारी सीजन में देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले व्यापारियों को ऐसे संकट से बचाया जा सके।

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