तीस हजारी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तय किए आरोप, 24 अक्टूबर से शुरू होगा ट्रायल; ड्राइवर-कंडक्टर पर पॉक्सो एक्ट के तहत चलेगा मुकदमा
दिल्ली में चलती स्लीपर बस में नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तीस हजारी स्थित फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय (Charges Frame) कर दिए हैं। अदालत ने मामले में गिरफ्तार बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप के खिलाफ नाबालिग के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण कानून यानी पॉक्सो (POCSO) एक्ट की विभिन्न कठोर धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए ‘इन-कैमरा’ (बंद कमरे) सुनवाई की और अब 24 अक्टूबर से अभियोजन पक्ष (Prosecution) के गवाहों के बयान दर्ज करने के साथ ट्रायल की शुरुआत करने की तारीख तय कर दी है।
यह मामला अगस्त के शुरुआती हफ्ते में सामने आया था, जब उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 11वीं की 16 वर्षीय छात्रा घरेलू विवाद के बाद नोएडा स्थित अपने रिश्तेदार के घर जाने के लिए निकली थी। बारिश के दौरान ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर वह वाहन का इंतजार कर रही थी, तभी उसने एक निजी स्लीपर बस को हाथ देकर रुकवाया। ड्राइवर और कंडक्टर ने बस को नोएडा ले जाने का झांसा देकर उसे अंदर बैठा लिया। इसके बाद दोनों ने खिड़कियों पर पर्दे खींचकर परी चौक से लेकर दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर के सफर के दौरान चलती बस में किशोरी के साथ दरिंदगी की। आरोपियों ने पीड़िता को कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर उतार दिया और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए कश्मीरी गेट थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी।
दिल्ली पुलिस ने मामले की तेजी से जांच करते हुए तिमारपुर इलाके की एक पार्किंग से वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस को जब्त किया और दोनों आरोपियों को धर दबोचा था। पुलिस ने 18 सितंबर को तीस हजारी कोर्ट में 398 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट पेश की थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया। जांच अधिकारियों के मुताबिक, मामले में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट सबसे निर्णायक सबूत बनकर उभरी है। पीड़िता के कपड़ों, बस की सीटों और स्टीयरिंग व्हील से जुटाए गए जैविक साक्ष्य (सीमेन और बालों के नमूने) दोनों आरोपियों के डीएनए प्रोफाइल से शत-प्रतिशत मैच कर गए हैं। इसके अलावा रास्ते के सीसीटीवी फुटेज और 10 से अधिक गवाहों के बयानों को भी आरोपपत्र का हिस्सा बनाया गया है।
चार्जशीट में बस के संचालन और सुरक्षा मानकों के गंभीर उल्लंघनों का भी खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि ‘विश्वनाथ टूर एंड ट्रेवल्स’ के तहत चलने वाली इस निजी स्लीपर बस का सीसीटीवी कैमरा खराब था और खिड़कियों पर अपारदर्शी पर्दे लगे हुए थे। बस में महिलाओं की सुरक्षा के लिए अनिवार्य पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (जीपीएस) पूरी तरह नदारद थे। इतना ही नहीं, बस मालिक ने ड्राइवर और कंडक्टर को बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) के काम पर रखा हुआ था और बस पर पहले से कई चालान लंबित थे। घटना के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और दिल्ली महिला आयोग ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की थी।
आरोप तय होने के बाद अब पीड़िता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष ने अदालत से दैनिक आधार पर (डे-टू-डे) सुनवाई का आग्रह किया है। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसे जघन्य मामलों में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद जल्द से जल्द ट्रायल पूरा करने का नियम है। 24 अक्टूबर को पहली सुनवाई के दौरान सरकारी वकील द्वारा गवाहों की गवाही, डॉक्टर और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स को अदालत के समक्ष औपचारिक रूप से साबित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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