आतंकवाद पर एस जयशंकर ने पाकिस्तान की लगा दी ‘लंका’, भारतीय पत्रकार बोलीं- यही इंडियन तरीका

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर जब भी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बोलने का नंबर आता है, तो पूरी दुनिया के कान खड़े हो जाते हैं। हाल ही में एक बार फिर उन्होंने अपने बेबाक, स्पष्ट और धारदार बयानों से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की पोल खोलकर रख दी है। वैश्विक मंचों पर पड़ोसी देश द्वारा फैलाई जा रही नापाक हरकतों और आतंकवाद के मुद्दों पर जयशंकर ने जिस आक्रामक और सटीक अंदाज में पाकिस्तान को आईना दिखाया है, उसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। इस कूटनीतिक प्रहार के बाद सोशल मीडिया से लेकर मीडिया गलियारों तक में इसकी चर्चा हो रही है, जहां एक प्रमुख भारतीय पत्रकार ने उनके इस अंदाज की सराहना करते हुए इसे ‘यही असली इंडियन तरीका’ करार दिया है। भारत की विदेश नीति में आए इस मुखर बदलाव ने दुनिया को यह बता दिया है कि अब देश अपनी सुरक्षा और सम्मान के मामलों पर किसी भी तरह की लीपापोती बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हमेशा से अपनी कूटनीतिक शैली में पारंपरिक दबी-छिपी भाषा के बजाय सीधे और तथ्यों पर आधारित बयानों को प्राथमिकता दी है। जब भी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में आतंकवाद के प्रायोजकों को बचाने या उस पर पर्दा डालने की कोशिश की जाती है, जयशंकर बिना किसी लाग-लपेट के सीधे शब्दों में उन देशों के चेहरे बेनकाब कर देते हैं। उनके भाषणों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि वे पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंडों को भी उतनी ही बेबाकी से सामने रखते हैं जितना कि क्षेत्रीय शत्रुओं की कारगुजारियों को। पाकिस्तान जैसे देश जो दशकों से आतंक को अपनी विदेश नीति का हथियार बनाते आए हैं, उन्हें अब वैश्विक मंचों पर भारत के इन कड़े और तार्किक सवालों का कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया में भारत के इस नए और आक्रामक कूटनीतिक रुख की मिसालें दी जा रही हैं।

अपने हालिया बयानों और साक्षात्कारों में एस जयशंकर ने एक बार फिर दोहराया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सामान्य संबंधों की बहाली का रास्ता केवल और केवल आतंकवाद के खात्मे से होकर गुजरता है। उन्होंने दुनिया को यह समझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि बातचीत और आतंक एक साथ नहीं चल सकते। जब तक सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक भारत किसी भी प्रकार के समझौते या सामान्य कूटनीतिक मेल-मिलाप के पक्ष में नहीं है। विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी यह चेतावनी दी कि जो देश आतंकवाद को अपने भू-राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल करते हैं, वे एक दिन खुद उसी आग में जलते हैं। पाकिस्तान के हुक्मरानों को संबोधित करते हुए उनके इस कड़े संदेश ने पड़ोसी देश में खलबली मचा दी है और वहां के मीडिया में भी इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

एस जयशंकर के इस खरी-खरी सुनाने वाले अंदाज पर देश की एक जानी-मानी वरिष्ठ पत्रकार ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उस पत्रकार ने कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े मंचों पर जिस तरह से एस जयशंकर ने पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाई है और आतंकवाद के मुद्दे पर उसे कठघरे में खड़ा किया है, वह किसी कूटनीतिक चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने इसे ‘यही इंडियन तरीका’ बताते हुए कहा कि अब भारत अपनी बात कहने में किसी डर या कूटनीतिक दबाव का अहसास नहीं कराता, बल्कि आंख में आंख डालकर अपने राष्ट्रीय हितों की बात रखता है। जनता ने भी इस टिप्पणी का जोरदार समर्थन किया और सोशल मीडिया पर जयशंकर के समर्थन में हजारों ट्रेंड्स चलाए गए, जो यह दर्शाते हैं कि देश की जनता अपनी सरकार और विदेश नीति के इस सख्त रुख के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

भारत की विदेश नीति पिछले कुछ वर्षों में एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। पहले जहां भारत पर अक्सर यह आरोप लगता था कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात बहुत नरमी से रखता है, वहीं आज का ‘नया भारत’ पूरी दृढ़ता और आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने अपनी बात रखता है। एस जयशंकर का यह तेवर केवल एक व्यक्ति का बयान नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों की उस भावना का प्रतिबिंब है जो आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति रखती है। दुनिया आज यह मानती है कि भारत वैश्विक महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और अपने आंतरिक तथा बाहरी सुरक्षा मामलों पर फैसले लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र और सक्षम है। पाकिस्तान के खिलाफ यह कूटनीतिक प्रहार इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि भारत अब अपनी शर्तों पर दुनिया के साथ संबंध तय कर रहा है।

Comments are closed.