राहुल गांधी को बीआरएस नेता केटीआर की खुली चुनौती, तेलंगाना आकर छात्रों से बात करने और रोजगार के वादों का हिसाब देने को कहा
देशभर की सियासत में अपनी पैठ मजबूत करने और युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने के दावों के बीच अब तेलंगाना की राजनीति में एक नया और बड़ा भूचाल आ गया है, क्योंकि बीआरएस के वरिष्ठ और आक्रामक नेता केटीआर ने राहुल गांधी को खुलेआम चुनौती दे डाली है कि वे सिर्फ दूर बैठकर या दूसरे राज्यों के मुद्दों पर बयानबाजी करने के बजाय सीधे तेलंगाना आएं और यहां के जमीन से जुड़े छात्रों की गंभीर समस्याओं को खुद अपनी आंखों से देखें व सुनें। कांग्रेस पार्टी और उसकी राज्य सरकार पर युवाओं, छात्रों, रोजगार और शिक्षा से जुड़े तमाम चुनावी वादों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम रहने का गंभीर आरोप लगाते हुए केटीआर ने इस राजनीतिक बहस को एक नया ही आयाम दे दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए साफ कहा कि राहुल गांधी जी को सबसे पहले अपने उस सियासी और नैतिक दायित्व को पूरा करना चाहिए जिसके तहत उन्होंने चुनाव से पहले तेलंगाना के नौजवानों को बड़े-बड़े सपने दिखाए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन तमाम वादों को हवा में उड़ा दिया गया। तेलंगाना की वर्तमान राजनीति में छात्र आंदोलन और युवा आक्रोश अब इस कदर मुखर हो चुका है कि विपक्षी दल इसे सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बनाने में जुट गए हैं। बीआरएस नेतृत्व का यह आक्रामक रुख इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में तेलंगाना की राजनीति में छात्र और युवा वर्ग के मुद्दे ही सत्ता और विपक्ष के बीच मुख्य संघर्ष का केंद्र बिंदु रहने वाले हैं, जिससे कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं और राजनीतिक गलियारों में इस चुनौती की गूंज बहुत दूर तक सुनाई दे रही है।
राहुल गांधी को सीधे चुनौती देते हुए केटीआर ने उन्हें हैदराबाद के अशोकनगर और करीमनगर आकर छात्रों के बीच समय बिताने और उनकी जमीनी हकीकत का सामना करने की बात कही है।
राहुल गांधी के इन दिनों जोरों पर चल रहे ‘छात्रों की गूंज’ अभियान पर बेहद तीखी और करारी प्रतिक्रिया देते हुए बीआरएस नेता केटीआर ने दो टूक शब्दों में कहा कि अन्य राज्यों के छात्रों के मुद्दों पर राजनीति करने और बयान देने से पहले राहुल गांधी को दक्षिण भारत के इस महत्वपूर्ण राज्य तेलंगाना की जमीनी हकीकत का सामना करना चाहिए। अपने तीखे तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले केटीआर ने अपने एक आक्रामक बयान में राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल जी, क्या आपको यहां के स्थानीय छात्रों की गूंज और चीखें सुनाई नहीं दे रही हैं? क्या आप इन नौजवानों की आवाज सुनने से कतरा रहे हैं? यदि आप में हिम्मत है तो तेलंगाना आइए, हम हैदराबाद के प्रसिद्ध अशोकनगर या फिर करीमनगर के छात्र चौराहों पर आपकी पूरी मेहमाननवाजी और आवभगत करने के लिए तैयार बैठे हैं, लेकिन आप यहां आइए और हमारे राज्य के पीड़ित छात्रों से आमने-सामने बैठकर बात कीजिए। उन्होंने चुनाव से पहले राहुल गांधी की उन मुलाкаतों और दौरों की याद दिलाई जब वे बड़े उत्साह के साथ बेरोजगार युवाओं और छात्रों से मिले थे और उन्हें ढेरों झूठे आश्वासन दिए थे। केटीआर ने सवाल उठाया कि जब चुनाव का समय था तब कांग्रेस नेताओं को इन युवाओं की याद बहुत सताती थी, लेकिन सरकार बनते ही उन तमाम वादों को कागजों में दफना दिया गया और आज वही छात्र सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी को यह बताना होगा कि जब तेलंगाना के छात्र अपनी विभिन्न मांगों और शिक्षा के हकों के लिए सड़कों पर आंसू बहा रहे हैं, तब देश के बड़े नेता बनकर घूमने वाले राहुल गांधी इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी क्यों साधे हुए हैं और वे तेलंगाना के युवाओं को जवाब क्यों नहीं देते।
राज्य में हर साल दो लाख सरकारी नौकरियों के बड़े और लोकलुभावन चुनावी वादे का अब क्या हुआ, इस तीखे सवाल के साथ केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार को भी आड़े हाथों लिया।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान बीआरएस नेता केटीआर ने केवल राहुल गांधी को ही नहीं घेरा, बल्कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली मौजूदा कांग्रेस सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया और राज्य प्रशासन की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पार्टी ने यह बड़ा और आधिकारिक वादा किया था कि उनकी सरकार बनने पर हर साल बिना किसी रुकावट के दो लाख सरकारी नौकरियां युवाओं को दी जाएंगी, लेकिन आज धरातल की स्थिति यह है कि वह वादा पूरी तरह हवा हवाई साबित हो चुका है। केटीआर ने आरोप लगाया कि जिन बेरोजगार युवाओं को चुनाव से पहले कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गजों ने बड़े चाव से देखा था और उनके वोट बटोरे थे, सरकार बनने के बाद उन तमाम युवाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज और शोषित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बहुप्रचारित जॉब कैलेंडर पर तीखा प्रहार करते हुए केटीआर ने कहा कि चुनाव के वक्त जिस जॉब कैलेंडर के नाम पर बड़े-बड़े ढिंढोरे पीटे गए थे, वह आज जमीन पर कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है, बल्कि उसकी जगह राज्य में केवल घोटालों और विफलताओं का ‘स्कैम कैलेंडर’ चल रहा है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में काम कम और केवल राजनीतिक बयानबाजी व एक-दूसरे पर छींटाकशी वाला ‘गाली-गलौज कैलेंडर’ प्रमुखता से चल रहा है, जिससे आम जनता और छात्र वर्ग का मोहभंग हो चुका है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में छात्रों का गुस्सा जिस प्रकार लगातार फूट रहा है और वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उससे यह साफ हो गया है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक संघर्ष और अधिक तीव्र होने वाला है।
तेलंगाना में पॉलीटेक्निक छात्रों का जोरदार विरोध प्रदर्शन और जीओ 97 के खिलाफ गुस्से की आग ने राज्य की कानून-व्यवस्था और शिक्षा नीति को एक बार फिर से राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
आखिर ऐसा क्या हो गया है कि तेलंगाना के छात्र और युवा इस समय सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हो गए हैं? इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ हाल ही में सामने आया वह सरकारी आदेश है जिसने पूरे राज्य के छात्र समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। हाल ही में करीमनगर समेत तेलंगाना के कई प्रमुख जिलों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पॉलीटेक्निक छात्रों ने जीओ 97 (GO 97) के तहत पॉलीटेक्निक शिक्षा को जबरन ‘यंग इंडिया स्किल यूनिवर्सिटी’ में विलय किए जाने के विरोध में बेहद जोरदार, उग्र और व्यापक प्रदर्शन किए हैं। छात्रों का स्पष्ट रूप से यह मानना और कहना है कि इस प्रकार के अव्यवहारिक और जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से उनकी तकनीकी शिक्षा का भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय हो जाएगा और उनके करियर के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। छात्रों के इस बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच अब बीआरएस पार्टी पूरी तरह से छात्रों के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर आई है, जिससे सरकार की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। राज्य का युवा वर्ग अपने भविष्य को लेकर अत्यधिक आशंकित और चिंतित है, और विपक्षी दल इसी असंतोष का भरपूर फायदा उठाकर सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस प्रकार एक तरफ जहां राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी के अभियानों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर रेवंत रेड्डी सरकार के खिलाफ छात्रों का यह आक्रोश तेलंगाना की राजनीति का सबसे गर्माता हुआ और प्रमुख मुद्दा बन चुका है, जिसका असर आने वाले आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ना बिल्कुल तय माना जा रहा है।
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