टोल वसूली में भारी धांधली पर ईडी का बड़ा एक्शन! यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक 14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी, कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त
राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स वसूली में करोड़ों रुपये के राजस्व गबन, फास्टैग (FASTag) सिस्टम की बाईपासिंग और बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा शिकंजा कसा है।
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए ईडी की संयुक्त टीमों ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर में स्थित 14 प्रमुख ठिकानों पर एक साथ सघन छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र टोल संग्रह का ठेका लेने वाली निजी कंसोर्टियम कंपनियां, उनके कॉरपोरेट दफ्तर और प्रमुख निदेशकों के निजी आवास रहे हैं।
प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कड़े सुरक्षा घेरे में यह सर्च ऑपरेशन एक साथ शुरू किया गया:
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उत्तर प्रदेश: लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी स्थित टोल ऑपरेटिंग कंपनियों के जोनल ऑफिस और प्रमोटरों के ठिकानों पर तलाशी ली गई। पूर्वांचल और लखनऊ-कानपुर हाईवे से जुड़े कुछ प्रमुख टोल प्लाजा के अकाउंट्स ऑफिस भी जांच के दायरे में रहे।
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महाराष्ट्र: मुंबई, ठाणे और पुणे में टोल प्रबंधन और हाईवे मेंटेनेंस से जुड़ी कंपनियों के मुख्यालयों पर छापेमारी की गई। कई वरिष्ठ अधिकारियों के ठिकानों से अहम सर्वर डेटा और लेन-देन का ब्योरा खंगाला गया।
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दिल्ली-एनसीआर: नई दिल्ली स्थित रजिस्टर्ड कॉर्पोरेट कार्यालयों में कंपनी ऑडिटर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के परिसरों पर भी जांच टीमों ने रिकॉर्ड जब्त किए।
यह कार्रवाई भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य सड़क विकास निगमों से प्राप्त शिकायतों व स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमों (FIRs) के आधार पर शुरू की गई मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
जांच में सामने आए प्रमुख तौर-तरीके:
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नकदी का समानांतर खेल (Off-the-Record Cash Collection): आरोप है कि वीआईपी मूवमेंट, कमर्शियल ओवरलोडेड वाहनों और बिना फास्टैग वाले वाहनों से दोगुनी पेनल्टी या नकद राशि वसूली जाती थी, जिसे आधिकारिक कैश लेजर या सिस्टम में दर्ज किए बिना समानांतर खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
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सॉफ्टवेयर और फास्टैग डेटा से छेड़छाड़: कुछ टोल प्लाजा पर स्थानीय सर्वरों में ऐसे सॉफ्टवेयर लूपहोल्स का इस्तेमाल किया गया जिससे वाहनों की वास्तविक आवाजाही और काटे गए टोल टैक्स के आंकड़ों में भारी अंतर (Discrepancy) दिखाया गया, ताकि सरकारी खजाने को मिलने वाली तय रॉयल्टी को कम करके आंका जा सके।
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शेल कंपनियों के जरिए मनी ट्रेल: टोल कलेक्शन से एकत्र ब्लैक मनी को फर्जी वेंडर्स, सब-कॉन्ट्रैक्टर्स और बोगस मेंटेनेंस बिलों के जरिए मुखौटा कंपनियों (Shell Entities) में घुमाकर निजी संपत्तियों और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में खपाने के साक्ष्य मिले हैं।
दिनभर चली इस मैराथन जांच के दौरान ईडी के अधिकारियों ने भारी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और सबूत अपने कब्जे में लिए हैं:
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टोल प्लाजा के बैकएंड सर्वर्स का हार्ड डिस्क डेटा, बैकअप ड्राइव्स और डिजिटल लॉग फाइल्स।
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करोड़ों रुपये की अघोषित नकदी, सोने के जेवरात और कई बेनामी बैंक खातों के चेकबुक व पासबुक।
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जमीन-जायदाद के निवेश से जुड़े गोपनीय डीड और पावर ऑफ अटॉर्नी से संबंधित कागजात।
ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जब्त डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है। कंपनी के निदेशकों, मुख्य वित्तीय अधिकारियों (CFOs) और टोल मैनेजर्स को विस्तृत पूछताछ के लिए समन जारी किए जा रहे हैं। एजेंसी का मानना है कि इस जांच के आगे बढ़ने पर कुछ स्थानीय अधिकारियों और बिचौलियों की संलिप्तता भी उजागर हो सकती है।
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