कावेरी विवाद ने पकड़ा भयानक उबाल: तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा पर तनाव की आहट, अट्टीबेले बॉर्डर पर नो एंट्री
दक्षिण भारत के दो पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराना कावेरी जल बंटवारा विवाद एक बार फिर से बेहद खतरनाक रूप ले चुका है। दोनों राज्यों के बीच पानी के इस घमासान ने अब सड़क पर उग्र रूप धारण कर लिया है, जिसके चलते कर्नाटक बंद के आह्वान के बाद सीमावर्ती इलाकों पर भारी तनाव के बादल मंडराने लगे हैं। खासकर कर्नाटक और तमिलनाडु को जोड़ने वाले अतिसंवेदनशील अट्टीबेले बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी गई है और वाहनों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगाते हुए ‘नो एंट्री’ जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे यात्रा करने वाले आम लोगों और परिवहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक बंद और सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात
कावेरी नदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के किसानों और राजनीतिक संगठनों के बीच छिड़ी जंग अब चरम सीमा पर पहुंच चुकी है, जिसके विरोध में विभिन्न कन्नड़ संगठनों द्वारा बुलाए गए कर्नाटक बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या हिंसा को समय रहते रोका जा सके। अट्टीबेले समेत दोनों राज्यों की सीमाओं पर भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है, जो हर आने-जाने वाले वाहन और संदिग्ध व्यक्ति की कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
अट्टीबेले बॉर्डर पर थमी गाड़ियों की रफ्तार और यातायात पर गहरा असर
कर्नाटक-तमिलनाडु की सीमा पर स्थित अट्टीबेले चेकपॉइंट पर उपजे तनाव और विरोध प्रदर्शनों के कारण अंतर-राज्यीय बस सेवाएँ, कमर्शियल ट्रक और निजी वाहन पूरी तरह से थम गए हैं। दोनों ओर से आने-जाने वाले यात्रियों को सुरक्षा कारणों से सीमा पर ही रोक दिया गया है, जिससे हाइवे पर वाहनों लंबी कतारें लग गई हैं। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और दोनों राज्यों के नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन कावेरी के पानी पर छिड़ी इस सियासी और सामाजिक रस्साकशी के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
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