मणिपुर में फिर बिगड़े हालात: आर्थिक नाकेबंदी के खिलाफ बफर जोन तक पहुंचे 200 कुकी प्रदर्शनकारी, गहराया राशन-दवा का संकट The situation in Manipur has worsened again: 200 Kuki protesters have reached the buffer zone to protest the economic blockade, deepening the ration and medicine crisis.

मणिपुर एक बार फिर अशांति की आग में झुलसता नजर आ रहा है। इंफाल वेस्ट और कांगपोकपी जिले की सीमा पर स्थिति उस समय विस्फोटक हो गई जब नागा संगठनों द्वारा लगाई गई ‘आर्थिक नाकेबंदी’ के विरोध में कुकी समुदाय के लगभग 200 प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। आवश्यक वस्तुओं, राशन और जीवन रक्षक दवाओं की बढ़ती किल्लत से नाराज प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों द्वारा बनाए गए ‘बफर जोन’ की तरफ मार्च करने की कोशिश की, जिससे क्षेत्र में भारी तनाव व्याप्त है।

हत्या से उपजा विवाद और नाकेबंदी का दौर

यह पूरा बवाल 6 नागा नागरिकों की दर्दनाक हत्या के बाद शुरू हुआ। नागा संगठनों का आरोप है कि लेलोन वैफेई से अपहरण के बाद इन नागरिकों को कुकी नेशनल फ्रंट (KNF-P) के उग्रवादियों को सौंप दिया गया, जिन्होंने बाद में उनकी जान ले ली। इस घटना के विरोध में युनाइटेड नागा काउंसिल (UNC), नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (NPO) और ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ANSAM) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी लगा दी है। नागा समूहों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह नाकेबंदी जारी रहेगी।

आमने-सामने आए समुदाय, सुरक्षाबलों का घेरा

आर्थिक नाकेबंदी की मार सीधे तौर पर कांगपोकपी जिले के निवासियों पर पड़ रही है, जहां आवश्यक आपूर्ति लगभग पूरी तरह ठप हो चुकी है। इसी के विरोध में मंगलवार को मोटबुंग और गामगिफई इलाके से बड़ी संख्या में कुकी प्रदर्शनकारियों ने कंगलातोंग्बी क्षेत्र की ओर मार्च किया। हालांकि, संवेदनशील सीमा पर पहले से मुस्तैद सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक दिया। पिछले सप्ताह भी इसी तरह की झड़पों में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे, जो इलाके की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

अल्टीमेटम खत्म, आगे क्या

कुकी-जो संगठनों की शीर्ष संस्था ‘कमिटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (CoTU) ने केंद्र और राज्य सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, जो अब समाप्त हो चुका है। उनकी मुख्य मांग राजमार्गों को खोलकर वस्तुओं की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करना है। वहीं, दूसरी ओर नागा छात्र और महिला संगठनों ने चेतावनी दी है कि नाकेबंदी का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वे सख्त रुख अपनाएंगे। सरकार और प्रशासन के सामने अब दो समुदायों के बीच के इस कड़े गतिरोध को खत्म करने की बड़ी चुनौती है, क्योंकि राशन और दवाओं की कमी से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।

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