₹2500 की नौकरी… 4 घरों में चौका-बर्तन और अब बंगाल सरकार में सीधे मंत्री! कलिता माझी की इस कहानी को सुन आंखें भर आएंगी
कोलकाता, राज्य ब्यूरो। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय एक ऐसी कहानी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, लेकिन यह सौ फीसदी हकीकत है। बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद हुए पहले मंत्रिमंडल विस्तार में एक ऐसे चेहरे को जगह मिली है, जिसका पूरा जीवन संघर्ष और कड़े इम्तिहानों से गुजरा है। पूर्व बर्धमान जिले की आउसग्राम विधानसभा सीट से विधायक बनीं 32 वर्षीय कलिता माझी को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी कैबिनेट में शामिल कर सबको चौंका दिया है। कल तक दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका करने वाली कलिता आज माननीय मंत्री जी बन चुकी हैं।
जब पेट पालने के लिए छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई, ऐसा था संघर्ष का सफर
कलिता माझी का जीवन बचपन से ही तंगहाली में बीता। एक बेहद साधारण परिवार में जन्मीं कलिता के सात बहनें और एक भाई हैं। पिता दिहाड़ी मजदूर थे, जिनकी मामूली कमाई से इतने बड़े परिवार का पेट पालना नामुमकिन जैसा था। आर्थिक तंगी का असर ऐसा हुआ कि कलिता को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। परिवार की मदद के लिए उन्होंने दूसरों के घरों में काम करना शुरू किया। वह हर महीने करीब 2500 रुपये कमाने के लिए चार अलग-अलग घरों में खाना बनाने और साफ-सफाई का काम करती थीं। उनके पति भी पेशे से एक प्लंबर हैं और बेटा आठवीं कक्षा में पढ़ता है। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, इस नए मंत्री की कुल जमा पूंजी महज 1.61 लाख रुपये है।
चुनावी प्रचार के लिए ली थी 45 दिन की छुट्टी, जनता से जुड़ा सीधा दिल का रिश्ता
कलिता के भीतर की राजनीतिक ललक कभी कम नहीं हुई। जब पार्टी ने उन पर भरोसा जताया, तो चुनाव प्रचार करने के लिए उन्होंने उन घरों से करीब डेढ़ महीने की छुट्टी ली, जहां वह काम करती थीं। इसके बाद शुरू हुआ उनका असली जमीनी संघर्ष। कलिता ने बिना किसी तामझाम के, पैदल ही घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की। उन्होंने वीआईपी नेताओं की तरह नहीं, बल्कि एक आम महिला की तरह लोगों का सुख-दुख साझा किया। जनता को भी अपने बीच की यह ‘घरेलू सहायिका’ इतनी अपनी लगी कि लोगों ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठा लिया।
बूथ स्तर की छोटी कार्यकर्ता से सीधे कैबिनेट मंत्री की कुर्सी तक
कलिता माझी का यह सफर रातों-रात तय नहीं हुआ है। वह पिछले करीब 10 सालों से भाजपा से जुड़ी हुई हैं और उन्होंने राजनीति का ककहरा बूथ स्तर की एक अदनी सी कार्यकर्ता के रूप में सीखा। पार्टी ने उनकी इसी वफादारी और मेहनत को देखते हुए साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भी टिकट दिया था। उस लहर में कलिता को करीब 41 फीसदी वोट तो मिले, लेकिन वह जीत का स्वाद नहीं चख सकीं। हार के बाद भी कलिता मायूस नहीं हुईं और मैदान में डटी रहीं। नतीजा यह हुआ कि साल 2026 के चुनाव में पार्टी ने उन्हें दोबारा मैदान में उतारा और इस बार उन्होंने आउसग्राम सीट से 12,535 वोटों के बड़े अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
भाजपा की जमीनी रणनीति और सामाजिक बदलाव की नई मिसाल
राजनीतिक गलियारों में कलिता माझी को मंत्री बनाए जाने को भाजपा की ‘ग्रासरूट लीडरशिप’ रणनीति का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी अब उन चेहरों को तरजीह दे रही है जो जमीन से जुड़े हैं और जो वातानुकूलित कमरों के बजाय सीधे जनता के बीच से निकलकर आते हैं। उनकी इस अविश्वसनीय कामयाबी पर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष ने भी बधाई दी। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी केवल प्रतिभा और कड़े परिश्रम को पहचानती है, चाहे वह व्यक्ति किसी भी बैकग्राउंड से आता हो। कलिता माझी का यह सफर केवल एक राजनीतिक पद पाना नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में आम आदमी की ताकत का सबसे बड़ा सबूत है।
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