News India Live, Digital Desk: हमारे देश के बैंकों और बीमा कंपनियों में जमा करोड़ों रुपये ऐसे हैं जिनका कोई वारिस सामने नहीं आया है। इस गंभीर मुद्दे पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से पूछा है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके बैंक खातों या बीमा पॉलिसियों में जमा ‘लावारिस धन’ (Unclaimed Funds) को उनके कानूनी वारिसों तक पहुँचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
करोड़ों रुपये का फंड है ‘लावारिस’
एक आंकड़े के अनुसार, विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों में हजारों करोड़ रुपये ऐसे पड़े हैं जिन्हें सालों से किसी ने क्लेम नहीं किया है। अक्सर खाताधारकों की अचानक मृत्यु के बाद उनके परिजनों को इन खातों या निवेश की जानकारी नहीं होती, जिससे यह पैसा सरकारी खजाने या विशेष फंड में पड़ा रह जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पैसे को उसके असली हकदारों तक पहुँचाने की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया है।
क्या है ‘सेंट्रलाइज्ड ट्रैकिंग सिस्टम’?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में एक ‘सेंट्रलाइज्ड ट्रैकिंग सिस्टम’ (Centralized Tracking System) बनाने की मांग की गई है।
एक ही जगह सारी जानकारी: इस सिस्टम के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने दिवंगत परिजन का नाम, पैन कार्ड या आधार नंबर डालकर यह चेक कर सकेगा कि उनका किन-किन बैंकों या कंपनियों में पैसा जमा है।
पारदर्शिता: इससे नॉमिनी (Nominee) को दर-दर भटकने की जरूरत नहीं होगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो जाएगी।
RBI का ‘उद्गम’ (UDGAM) पोर्टल: हालांकि आरबीआई ने ‘UDGAM’ पोर्टल शुरू किया है, लेकिन कोर्ट इसे और अधिक व्यापक और सुलभ बनाने के पक्ष में है।
नॉमिनेशन प्रक्रिया को अनिवार्य और सख्त बनाने की तैयारी
अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कई पुराने खातों में नॉमिनी की जानकारी अपडेट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में:
बैंक खाता खोलते समय नॉमिनी (Nominee) का नाम देना अनिवार्य और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) मिलते ही बैंकों को खुद सक्रिय होकर वारिसों से संपर्क करने का निर्देश दिया जा सकता है।
ई-केवाईसी (e-KYC) के जरिए लावारिस पड़े पैसों की पहचान तेज की जाएगी।
आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला?
यह खबर हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जिसने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सेविंग अकाउंट या लाइफ इंश्योरेंस में निवेश किया है। कोर्ट की सख्ती के बाद अब बैंकों के लिए यह छिपाना मुश्किल होगा कि किस खाते में कितना पैसा अनक्लेम्ड है। सरकार को अब एक ऐसी व्यवस्था देनी होगी जिससे आम आदमी को अपनी ही विरासत पाने के लिए कानूनी पेचीदगियों में न फंसना पड़े।
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