News India Live, Digital Desk : अदालतों का नाम आते ही दिमाग में काला कोट, सफेद बैंड और एक गंभीर माहौल की तस्वीर उभरती है। लेकिन अब फैमिली कोर्ट (Family Court) का नजारा बदलने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत (Justice Surya Kant) ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि फैमिली कोर्ट में जजों और वकीलों को अपनी आधिकारिक वर्दी (Uniform) में नहीं आना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि इन अदालतों का माहौल डरावना नहीं, बल्कि घर जैसा होना चाहिए।
क्यों दी गई ‘बिना वर्दी’ आने की सलाह?
जस्टिस सूर्यकांत ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि फैमिली कोर्ट में आने वाले मामले भावनात्मक होते हैं और उनमें बच्चे भी शामिल होते हैं।
बच्चों पर मनोवैज्ञानिक असर: जब छोटे बच्चे कोर्ट के कड़क और औपचारिक माहौल में जजों और वकीलों को काली वर्दी में देखते हैं, तो वे डर जाते हैं। इससे उनकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है।
तनाव कम करने की कोशिश: जस्टिस सूर्यकांत के अनुसार, अगर जज और वकील साधारण कपड़ों में होंगे, तो पक्षकारों (पति-पत्नी) के बीच बातचीत का माहौल बनेगा और विवादों को सुलझाना आसान होगा।
फैमिली कोर्ट को ‘काउंसलिंग सेंटर’ बनाने पर जोर
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि फैमिली कोर्ट का मुख्य उद्देश्य कानूनी लड़ाई जीतना नहीं, बल्कि टूटते परिवारों को जोड़ना होना चाहिए।
दोस्ताना माहौल: जजों को एक न्यायकर्ता के बजाय एक मार्गदर्शक (Mediator) की भूमिका निभानी चाहिए।
गोपनीयता और संवेदनशीलता: पारिवारिक विवादों की सुनवाई के दौरान संवेदनशीलता बरतना जरूरी है, ताकि रिश्तों की गरिमा बनी रहे।
बदल जाएगी अदालतों की तस्वीर?
यह पहली बार नहीं है जब न्यायपालिका में वर्दी को लेकर चर्चा हुई है। बाल सुधार गृहों और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में भी पुलिस और वकीलों को वर्दी के बिना रहने की सलाह दी जाती है। जस्टिस सूर्यकांत की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में फैमिली कोर्ट्स को अधिक ‘चाइल्ड-फ्रेंडली’ (बाल-सुलभ) और कम तनावपूर्ण बनाया जाएगा।
Comments are closed.