किशनगंज में हाथियों का तांडव कई घर तोड़े, फसलें रौंदी, जान बचाने के लिए गांव खाली कर भाग रहे लोग

News India Live, Digital Desk: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित किशनगंज के दिघलबैंक (Dighalbank) प्रखंड में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ दिनों से हाथियों का झुंड रिहायशी इलाकों में घुसकर न केवल संपत्तियों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बना हुआ है।

घटना की मुख्य बातें 

देर रात हमला: हाथियों का झुंड बूढ़ी कनकई नदी पार कर भारतीय सीमा के गांवों में दाखिल हुआ। तेज बारिश और आंधी के बीच हाथियों ने सुरीभिट्टा आदिवासी टोला और आसपास के इलाकों में धावा बोला।

घरों को नुकसान: हाथियों ने कई कच्चे और टीन की छत वाले घरों की दीवारें ढहा दीं। घरों के अंदर रखे अनाज (धान और चावल) को हाथियों ने चट कर दिया और बाकी सामान बर्बाद कर दिया।

मक्के की फसल हुई बर्बाद: सीमावर्ती क्षेत्रों में मक्के की फसल तैयार होने वाली है, जिसे हाथियों ने पैरों तले रौंदकर पूरी तरह नष्ट कर दिया है। इससे किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है।

ग्रामीणों का पलायन: हाथियों के अचानक सामने आने से गांवों में भगदड़ मच गई। लोग अपने बच्चों और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों या ऊंचे पक्के मकानों की ओर भाग रहे हैं। कई परिवारों ने रात खुले आसमान के नीचे या पड़ोसी गांवों में बिताई।

प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई

एलिफेंट ट्रैकर्स तैनात: वन विभाग ने हाथियों की निगरानी के लिए स्थानीय ‘एलिफेंट ट्रैकर्स’ को भेजा है। हालांकि, खराब मौसम और अंधेरे के कारण हाथियों को खदेड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

मिर्च का प्रयोग: डीएफओ (DFO) ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि हाथियों को बस्तियों से दूर रखने के लिए मिर्च पाउडर जलाकर धुआं करें, जो उन्हें दूर रखने का एक पारंपरिक तरीका है।

मुआवजे का आश्वासन: विभाग ने क्षतिग्रस्त घरों और फसलों की रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है ताकि पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता मिल सके।

हाथियों के बार-बार आने का कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल के जंगलों में भोजन की कमी और मक्के के सीजन के कारण हाथी अक्सर सीमा पार कर बिहार के इन इलाकों में आ जाते हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से इस क्षेत्र में ‘एलिफेंट कॉरिडोर’ बनाने की मांग कर रहे हैं ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

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