News India Live, Digital Desk: हाल ही में हरीश राणा के मामले ने पूरे देश में ‘इच्छा मृत्यु’ (Euthanasia) को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। 36 वर्षीय हरीश राणा पिछले 11 सालों से वेजिटेटिव स्टेट (चेतना शून्य अवस्था) में हैं, जिसके बाद उनके माता-पिता ने उनके लिए इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। भारत में जहां ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (Passive Euthanasia) को लेकर कड़े नियम हैं, वहीं दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां लाइलाज बीमारी से जूझ रहे लोगों को कानूनी तौर पर अपनी जान देने का अधिकार प्राप्त है।
आइए जानते हैं उन 5 प्रमुख देशों के बारे में जहां इच्छा मृत्यु या असिस्टेड सुसाइड (Assisted Suicide) पूरी तरह कानूनी है:
1. नीदरलैंड (Netherlands)
नीदरलैंड दुनिया का पहला ऐसा देश था जिसने अप्रैल 2002 में इच्छा मृत्यु को वैध बनाया था। यहाँ के नियम काफी सख्त हैं। मरीज को असहनीय पीड़ा होनी चाहिए जिसका कोई इलाज न हो, और उसे पूरी तरह होशोहवास में अपनी इच्छा जाहिर करनी पड़ती है।
2. बेल्जियम (Belgium)
बेल्जियम ने भी 2002 में इच्छा मृत्यु को कानूनी मान्यता दी थी। खास बात यह है कि 2014 में बेल्जियम दुनिया का पहला ऐसा देश बना जिसने बच्चों के लिए भी (कुछ विशेष परिस्थितियों में) इच्छा मृत्यु की अनुमति दी, बशर्ते वे गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों और उनकी पीड़ा का कोई अंत न हो।
3. कोलंबिया (Colombia)
दक्षिण अमेरिकी देशों में कोलंबिया इस मामले में सबसे आगे है। यहाँ 1997 से ही इच्छा मृत्यु को लेकर चर्चा थी, लेकिन 2015 में इसे आधिकारिक रूप से नियमित किया गया। 2021 में यहाँ के कोर्ट ने उन लोगों को भी यह अधिकार दे दिया जो केवल टर्मिनल इलनेस (अंतिम चरण की बीमारी) से ही नहीं, बल्कि अन्य गंभीर शारीरिक कष्टों से भी जूझ रहे हैं।
4. लक्ज़मबर्ग (Luxembourg)
इस यूरोपीय देश ने मार्च 2009 में इच्छा मृत्यु और असिस्टेड सुसाइड को वैध बनाया। यहाँ भी शर्त यही है कि मरीज को कोई ऐसी बीमारी हो जिसका उपचार संभव न हो और वह असहनीय शारीरिक या मानसिक कष्ट में हो।
5. स्विट्जरलैंड (Switzerland)
स्विट्जरलैंड इस मामले में सबसे अनोखा है। यहाँ ‘असिस्टेड सुसाइड’ (डॉक्टर की मदद से आत्महत्या) 1942 से ही कानूनी है। यहाँ ‘डिग्नितास’ (Dignitas) जैसी संस्थाएं हैं जो उन लोगों की मदद करती हैं जो सम्मानजनक मौत चाहते हैं। यहाँ तक कि दूसरे देशों के लोग भी इस प्रक्रिया के लिए स्विट्जरलैंड जाते हैं।
क्या कहता है भारतीय कानून?
भारत में ‘पैसिव यूथेनेशिया’ (मरीज का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटा देना) को 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी थी, लेकिन ‘एक्टिव यूथेनेशिया’ (जहर का इंजेक्शन देकर जान लेना) अभी भी गैर-कानूनी है। हरीश राणा का मामला भारत में इस जटिल कानूनी और नैतिक मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।
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