समालखा में प्रतिनिधि सभा, शताब्दी वर्ष और संगठन विस्तार पर मंथन

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समग्र समाचार सेवा
समालखा (पानीपत), 11 मार्च  : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में आयोजित की जाएगी। तीन दिन तक चलने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर से संघ और संघ प्रेरित संगठनों के कुल 1487 प्रतिनिधि  भाग लेंगे।

यह जानकारी संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर  ने माधव सृष्टि परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों को दी। इस अवसर पर मंच पर  उत्तर क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल भी उपस्थित रहे।

सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक का शुभारंभ  13 मार्च की सुबह 9 बजे  होगा, जिसमें संघ के सरसंघचालक  डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह  दत्तात्रेय होसबाले  उपस्थित रहेंगे। इस बैठक में संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी, विभिन्न क्षेत्रों और प्रांतों के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक तथा संघ प्रेरित  32 संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी शामिल होंगे।

 शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा

प्रेस वार्ता में आंबेकर ने बताया कि वर्तमान में संघ के  शताब्दी वर्ष  के कार्यक्रम देशभर में चल रहे हैं। इस बैठक में इन कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ-साथ आगे की रणनीति और योजनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी।

उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चलाए जा रहे  गृह संपर्क अभियान  के माध्यम से अब तक कुछ प्रांतों में  10 करोड़ से अधिक घरों तक संपर्क स्थापित किया जा चुका है। आने वाले समय में शेष प्रांतों में भी यह अभियान जारी रहेगा, जिससे समाज के व्यापक वर्गों तक संगठन का संवाद और संपर्क बढ़ाया जा सके।

संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष पर भी चर्चा

बैठक में  संत शिरोमणि रविदास  की  650वीं जयंती वर्ष  के कार्यक्रमों पर भी चर्चा होगी। यह कार्यक्रम  1 फरवरी से अगले वर्ष 20 फरवरी तक पूरे देश में आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज में  समरसता और सामाजिक सद्भाव का संदेश  देना है।

बैठक के अंतिम दिन 15 मार्च को सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले प्रेस वार्ता में प्रतिनिधि सभा के दौरान लिए गए निर्णयों और प्रस्तावों की जानकारी देंगे और पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर भी देंगे।

सामाजिक चुनौतियों और समसामयिक मुद्दों पर विचार

इस बैठक में देशभर से आए कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों के सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव साझा करेंगे। इन अनुभवों के आधार पर देश के सामने मौजूद  समसामयिक सामाजिक चुनौतियों और परिस्थितियों पर भी गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

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