ईरानी युद्धपोत के डूबने पर एस. जयशंकर का बड़ा बयान, कहा हालात के गलत मोड़ पर फंस गए थे जहाज

News India Live, Digital Desk: हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena के डूबने और एक अन्य जहाज IRIS Lavan को भारत में शरण दिए जाने पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अहम प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग’ में उन्होंने कहा कि जब ये जहाज भारत आए थे तब स्थिति अलग थी, लेकिन वापसी के समय ये “घटनाओं के गलत पक्ष” (Caught on the wrong side of events) पर फंस गए।

कोच्चि में क्यों दी गई ईरानी जहाज को जगह?

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ईरानी नौसेना का जहाज IRIS Lavan तकनीकी खराबी के कारण संकट में था। 1 मार्च को जब ईरान की ओर से मदद मांगी गई, तो भारत ने मानवीय आधार पर इसे कोच्चि पोर्ट पर डॉक करने की अनुमति दी। विदेश मंत्री के अनुसार, “जहाज पर कई युवा कैडेट सवार थे। मुश्किल समय में उनकी मदद करना एक मानवीय फैसला था और हमने इसी सिद्धांत का पालन किया।”

IRIS Dena का डूबना ‘दुर्भाग्यपूर्ण’

बता दें कि IRIS Dena वही युद्धपोत है जिसने पिछले महीने भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित ‘मिलन 2026’ (MILAN 2026) नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लिया था। वापसी के दौरान श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी के हमले में यह डूब गया। जयशंकर ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत ने इसके बचाव कार्य (Search and Rescue) में भी मदद की थी।

हिंद महासागर की हकीकत को समझना जरूरी

विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर चल रही बहस का जवाब देते हुए कहा कि लोगों को हिंद महासागर की रणनीतिक जटिलता को समझना चाहिए। उन्होंने डिएगो गार्सिया और जिबूती जैसे विदेशी सैन्य अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के लिए अपने नागरिकों और मर्चेंट नेवी के कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। दुनिया भर के मर्चेंट जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, और किसी भी समुद्री हमले का उन पर सीधा असर पड़ता है।

भारत की नीति: मानवता बनाम कानूनी पेच

जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भले ही अंतरराष्ट्रीय कानून और UNCLOS (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) महत्वपूर्ण हैं, लेकिन संकट के समय भारत ने ‘इंसानियत’ को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, “जब कोई जहाज संकट में मदद मांगता है, तो हम कानूनी बारीकियों से परे जाकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हैं। हमने वही किया जो सही था।”

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