IAS-IPS की लापरवाही अब पड़ेगी भारी सरकार ला रही है कंप्रिहेंसिव स्कोरकार्ड, अब काम के आधार पर मिलेगी रेटिंग
News India Live, Digital Desk: भारत के प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही तय करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। अब सिविल सेवा अधिकारियों (IAS, IPS और अन्य) का मूल्यांकन केवल उनकी पुरानी फाइलों या सालाना रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि एक ‘कंप्रिहेंसिव स्कोरकार्ड’ (Comprehensive Scorecard) के आधार पर होगा। यह नई प्रणाली सरकारी काम-काज के तरीके को पूरी तरह से बदलने वाली मानी जा रही है।
क्या है यह नया स्कोरकार्ड सिस्टम?
इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य सरकारी बाबुओं की कार्यशैली में पारदर्शिता और तेजी लाना है। इस स्कोरकार्ड के तहत:
डेटा-आधारित मूल्यांकन: अधिकारियों के प्रदर्शन को मापने के लिए डिजिटल डेटा और रियल-टाइम प्रोग्रेस का उपयोग किया जाएगा।
पब्लिक फीडबैक: सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों द्वारा दी जाने वाली जन-सेवाओं पर जनता के फीडबैक को भी स्कोरकार्ड में जगह मिल सकती है।
प्रोजेक्ट टाइमलाइन: किसी प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष अंक मिलेंगे।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
वर्तमान में सिविल सेवकों की वार्षिक कार्य रिपोर्ट (APAR) काफी हद तक उनके वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणियों पर निर्भर करती है। सरकार का मानना है कि इस नई ‘स्कोरकार्ड’ व्यवस्था से:
पक्षपात खत्म होगा: अधिकारी की रेटिंग केवल उसके ठोस काम और परिणामों पर आधारित होगी।
जवाबदेही तय होगी: सुस्त अधिकारियों के लिए करियर में आगे बढ़ना मुश्किल होगा, जबकि बेहतर काम करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा।
भ्रष्टाचार पर लगाम: जब हर काम का डिजिटल रिकॉर्ड और स्कोर होगा, तो काम लटकाने की प्रवृत्ति कम होगी।
प्रशासनिक सुधार का ‘नया अध्याय’
प्रधानमंत्री मोदी के ‘मैक्सिमम गवर्नेंस’ विजन के तहत, यह कदम सिविल सर्विसेज में एक बड़े रिफॉर्म (Reform) के तौर पर देखा जा रहा है। इसे Mission Karmayogi के अगले चरण के रूप में भी माना जा रहा है, जिससे सरकारी मशीनरी को अधिक पेशेवर और संवेदनशील बनाया जा सके।
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