सोशल मीडिया पर अब और सक्रिय होगा संघ मोहन भागवत बोले काम बढ़ रहा है, अब रील और मीम के दौर में पीछे नहीं रह सकते

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News India Live, Digital Desk: जैसे-जैसे आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष (100 साल) के करीब पहुँच रहा है, संगठन अपनी कार्यशैली में बड़े बदलाव ला रहा है। मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि समाज के बदलते स्वरूप के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघ को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी उपस्थिति और मजबूत करनी होगी।

1. सोशल मीडिया और ‘सृजनात्मक’ उपयोग

मीम और रील का दौर: भागवत ने स्वीकार किया कि आज के समय में मीम (Memes) और रील (Reels) सूचना के प्रसार का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, इसलिए संघ को अच्छे उद्देश्य के लिए इन मंचों पर सक्रियता बढ़ाने की आवश्यकता है।”

स्वीकार्यता में वृद्धि: उन्होंने बताया कि संघ का प्रचार विभाग पहले से ही सामग्री साझा कर रहा है, लेकिन अब इसे और अधिक जन-केंद्रित और प्रभावशाली बनाने की जरूरत है ताकि इसे व्यापक स्वीकार्यता मिल सके।

2. संगठन का विस्तार और विकेंद्रीकरण (Decentralization)

आरएसएस के बढ़ते काम को देखते हुए भागवत ने संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव के संकेत दिए:

छोटी इकाइयां: जनता की बढ़ती अपेक्षाओं और स्वयंसेवकों की भारी मांग के कारण अब छोटी इकाइयों (Small Units) पर ध्यान दिया जाएगा ताकि कार्य में दक्षता (Efficiency) बनी रहे।

प्रदेश स्तर पर समन्वय: सरकार और प्रशासन के साथ बेहतर संवाद के लिए अब ‘प्रदेश-स्तरीय’ विशेष समन्वय तंत्र बनाया जा रहा है ताकि स्थानीय स्तर की बाधाओं को तेजी से दूर किया जा सके।

3. ‘तरुण भारत’ के 100 साल: पत्रकारिता का धर्म

मराठी पत्र ‘तरुण भारत’ के योगदान की सराहना करते हुए भागवत ने कहा:

सच्चाई का पक्ष: पत्रकारिता का काम केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है।

स्वयंसेवक का गुण: उन्होंने कहा कि जब एक समर्पित स्वयंसेवक तैयार होता है, तो उसका कार्य केवल शाखा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज में वांछित बदलाव लाता है।

4. शताब्दी वर्ष की योजनाएं (Centenary Year Goals)

मार्च 2026 में हरियाणा के समालखा में हुई ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ (ABPS) के निर्णयों के अनुसार:

शाखाओं का विस्तार: संघ का लक्ष्य देश के हर मंडल और बस्ती तक अपनी पहुंच बनाना है।

पंच परिवर्तन: सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक मूल्य), पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य—इन 5 विषयों पर डिजिटल और जमीनी स्तर पर व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

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